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बेटे को बचाने 12 फीट गहरे टैंक में कूदी मां, तैरकर किनारे ले आई पर फिर भी नहीं बचा पाई बच्चे को

3 वर्ष पहले
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हांसी (हरियाणा)।  चार साल के बेटे को वाटर टैंक में डूबते देख योगेश की मां रेखा ने उसे बचाने का हरसंभव प्रयास किया। बेटे को बचाने के लिए वह 12 फुट गहरे इस वाटर टैंक में भी कूद गई। योगेश रेखा का इकलौता बच्चा था। उसे टैंक में कूदा देख ससुर रामस्वरूप और सास प्रेमपति ने भी टैंक में छलांग लगा दी। रेखा अपने बेटे योगेश को खींच कर किनारे तक ले आई, लेकिन संतुलन नहीं बना सकी और टैंक के अंदर ही रह गई। ऐसे वाटर टैंक में गिर गया था 4 साल का बच्चा...


- गनीमत रही कि मौके पर तीन युवक पहुंच गए। उन्होंने रेखा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन बच्चे और दादा-दादी को नहीं बचा सके। डूबने से तीनों की टैंक के अंदर ही हालत खराब हो चुकी थी।

- तीनों को उपचार के लिए हांसी लाया गया, जहां सिविल अस्पताल में तीनों को मृत घोषित कर दिया गया। महजद में हुई घटना में एक-दूसरे को बचाने के लिए पूरा परिवार पानी के टैंक में कूद गया।

- सभी ने एक दूसरे को बचाने के लिए हर प्रयास किए। लेकिन तैरना नहीं आने के कारण वे बच नहीं सके।

 

बागवानी के लिए बनाए टैंक में पैर फिसलने से गिर गया था 4 साल का योगेश

- महजद के ही रहने वाले रामस्वरूप पिछले दस वर्षों से एडवोकेट कुलदीप का खेत ठेके पर लेकर काश्त कर रहे थे। वह खेत में कीनू के साथ साथ अन्य फसलों की खेती करते थे। 

- बागबानी के लिए खेत में पानी का बड़ा वाटर टैंक बनाया गया। जो दस से बारह फुट गहरा था। इस वाटर टैंक में पिछले सप्ताह ही नहर से पानी भरा गया था।

- रोज की तरह रामस्वरूप अपने पूरे परिवार के साथ सुबह खेत में गए। उनकी पत्नी प्रेमपति, पुत्रवधू रेखा, रेखा का चार वर्षीय बेटा योगेश व रामवस्वरूप के बड़े बेटे रामपाल के बेटा-बेटी साथ में थे।

- बेटा वीरभान मजदूरी के लिए कहीं और गया हुआ था। सुबह दस बजे के करीब उनका पोता योगेश पैर फिसलने के कारण पानी के टैंक में गिर गया। 

- योगेश को बचाने मां रेखा टैंक में कूद गई। रेखा को तैरना आता था। जैसे-तैसे कोशिश करके वह अपने बेटे योगेश को किनारे पर लेकर आई। लेकिन काई जमा होने के कारण चढ़ नहीं पाई।

- उसे टैंक में फंसा देख रामस्वरूप टैंक में कूद गए।  परिवार को टैंक के अंदर प्रेमपति भी बचाने के लिए अंदर कूद गईं। उन्होंने शोर मचाना शुरू किया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा।

- उसी समय रेखा की आठ वर्षीय भतीजी वहां पहुंची। रेखा ने उसे कहा कि गांव में जाकर मदद लेकर आए। भतीजी शोर मचाते हुए गांव की तरफ भागी।

- इसी दौरान बाइक सवार मनोज उन्हें मिले और उसने मदद की गुहार लगाई। जिस पर वह पानी के टैंक पर पहुंचे। इतने में दो अन्य युवक जोगिंद्र व संजय भी वहां पहुंच गए।