पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Panchkula News 5 Thousand Fine On Engineering Wing For Giving Wrong Water Bill

पानी का बिल गलत देने पर इंजीनियरिंग विंग पर 5 हजार जुर्माना

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

इंजीनियरिंग विंग की ओर से बरती गई लापरवाही से कंज्यूमर के घर हजारों रुपए पानी का बिल आ गया। समय रहते कंज्यूमर को उसके खराब पानी के मीटर के बारे में भी नहीं बताया गया। कंज्यूमर ने परेशान होकर मामले की शिकायत कंज्यूमर फोरम में दी और फोरम ने इंजीनियरिंग विंग पर जुर्माना लगाया। सेक्टर-4 के राम गोपाल दहिया को 1 जनवरी 2019 से 28 फरवरी 2019 तक का पानी का बिल 22,968 रुपए का भेजा। कंज्यूमर को इससे पहले के महीने 1 नवंबर 2018 से 31 दिसंबर 2018 तक का पानी का बिल डिलीवर नहीं किया गया था जो कि कंज्यूमर ने नहीं जमा किया था। मार्च में पानी बिल मिलते ही कंज्यूमर हरियाणा राज्य विकास प्राधिकरण के सेक्टर-8 स्थित डिविजन नंबर 4 ऑफिस पहुंचा और संबंधित अधिकारी से मिलकर नवंबर व दिसंबर 2018 का पानी का बिल दिए जाने की रिक्वेस्ट की। इस पर अधिकारी की ओर से नवंबर व दिसंबर 2018 का 11,821 रुपए और 1041 रुपए सरचार्ज सहित पानी का बिल थमाते हुए जल्द से जल्द जमा करवाने को कहा। कंज्यूमर ने दोनों बिल सही नहीं होने की बात कह बिल करेक्शन के लिए अधिकारियों से रिक्वेस्ट की। अधिकारियों ने बिल करेक्शन करने से मना कर दिया और कहा कि तुम्हारा मीटर डेड है और इस केस में पहले बिल जमा करवाओ। प्रोसिडिंग के मुताबिक सरकारी अधिकारियों या फिर कर्मचारियों की ओर से कंज्यूमर एक बार भी मीटर डेड होने की जानकारी नहीं दी गई थी। बावजूद इसके कंज्यूमर ने मीटर डेड होने के कंडीशन में औसतन बिल लिए जाने की बात कहते हुए बिल करेक्शन की डिमांड की और उसे अधिकारियों ने सिरे से नकार दिया।

इंजीनियरिंग विंग ने फोरम में ये दलील दी...

प्रोसिडिंग के मुताबिक हरियाणा राज्य विकास प्राधिकरण के इंजीनियरिंग विंग की ओर से कहा गया कि वाॅटर बायलॉज के मुताबिक 1 सितंबर 2018 से 31 अक्टूबर 2018 तक मीटर डेड होने की वजह से औसतन बिल चार्ज किया गया था। उसके बाद अगला बिल फ्लैट रेट के मुताबिक कंज्यूमर को डिलीवर किया गया। मीटर को रिप्लेस करवाने की जिम्मेदारी कंज्यूमर की होती है। कंज्यूमर की ओर से 1 नवंबर 2018 से 31 दिसंबर 2018 का पानी की बिल नहीं डिलीवर किए जाने का झूठा बयान दिया गया है क्योंकि पानी व सीवरेज का बिल मौके पर ही कंज्यूमर को दे दिया जाता है। ऐसे में कंज्यूमर की ओर से लगाए गए आरोप गलत हैं।

तक का पानी का बिल डिलीवर नहीं किया गया था जो कि कंज्यूमर ने नहीं जमा किया था। मार्च में पानी बिल मिलते ही कंज्यूमर हरियाणा राज्य विकास प्राधिकरण के सेक्टर-8 स्थित डिविजन नंबर 4 ऑफिस पहुंचा और संबंधित अधिकारी से मिलकर नवंबर व दिसंबर 2018 का पानी का बिल दिए जाने की रिक्वेस्ट की। इस पर अधिकारी की ओर से नवंबर व दिसंबर 2018 का 11,821 रुपए और 1041 रुपए सरचार्ज सहित पानी का बिल थमाते हुए जल्द से जल्द जमा करवाने को कहा। कंज्यूमर ने दोनों बिल सही नहीं होने की बात कह बिल करेक्शन के लिए अधिकारियों से रिक्वेस्ट की। अधिकारियों ने बिल करेक्शन करने से मना कर दिया और कहा कि तुम्हारा मीटर डेड है और इस केस में पहले बिल जमा करवाओ। प्रोसिडिंग के मुताबिक सरकारी अधिकारियों या फिर कर्मचारियों की ओर से कंज्यूमर एक बार भी मीटर डेड होने की जानकारी नहीं दी गई थी। बावजूद इसके कंज्यूमर ने मीटर डेड होने के कंडीशन में औसतन बिल लिए जाने की बात कहते हुए बिल करेक्शन की डिमांड की और उसे अधिकारियों ने सिरे से नकार दिया।

जुर्माने की राशि एक महीने में देने का आदेश दिया..

कंज्यूमर फोरम की ओर से कहा गया कि एचएसवीपी के वाॅटर वर्क्स के सुपरिटेंडेंट को कंज्यूमर का ध्यान रखते हुए व नियम का पालन करते हुए फ्लैट रेट के बजाए औसतन बिल चार्ज किया जाना चाहिए जो कि नहीं किया गया। ऐसे में 19 जनवरी 2019, 9 मार्च 2019, 14 मई 2019 और 11 जून 2019 के फ्लैट पानी के बिल को कैंसिल करते हुए फोरम ने 1345.8 रुपए के हिसाब से 5383.2 रुपए का बिल कंज्यूमर को जमा करने को कहा। साथ ही कंज्यूमर को हुई मानसिक व शारीरिक परेशानी और मुकदमे की राशि के तहत 5 हजार रुपए का हरियाणा राज्य विकास प्राधिकरण के इंजीनियरिंग विंग पर जुर्माना लगाया।
खबरें और भी हैं...