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कहानी उस महिला की, जो गर्भाशय के कैंसर के कारण प्रेग्नेंट न हो सकती थी, खून चूसने वाले जोंेक से उसने अपना इलाज किया और कैंसर खत्म करके हो गई प्रेग्नेंट

Dainik Bhaskar

Jun 24, 2018, 12:13 PM IST

बार-बार टॉयलेट आना, सेक्स के दौरान दर्द और पीठ के निचले हिस्से में दर्द के सिमटम्स दिखाई देने लगते हैं।

500 LEECHES got her pregnant, destroyed cancer cells and improved her orgasms
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लंदन. एक महिला ने खून चूसने वाले जोंक (लीच) की थैरेपी कर कैंसर खत्म होने और उसके बाद प्रेग्नेंट होने का दावा किया है। लंदन की रहने वाली 50 साल की नीना इवांस को 45 साल की उम्र में गर्भाशय में कैंसर के फिबरॉइड मिले थे। इसकी वजह से वह कभी मां नहीं बन सकती थी। लेकिन लीच थैरेपी से न सिर्फ उसने बीमारी ठीक की, बल्कि वह बाद में प्रेग्नेंट भी हो गई। इसे साइंस में 'लीच प्रेग्नेंसी' कहा जाता है। महिला ने बताया कि लीच थैरेपी की वजह से उसका प्री-कैंसेरियस फिबरॉइड ठीक हो गया, बल्कि उसे अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कराने में भी बहुत मदद मिली। मां नहीं बन सकती थी नीना...

- नीना ने बताया कि पहली शादी से उसे एक बेटा है। लेकिन 2003 में दूसरी शादी के बाद वह एक और बच्चा चाहती थी। करीब पांच साल कोशिश करने के बाद जांच में उसके गर्भाशय में कई सारे म्योमास मिले। दरअसल, म्योमास एक 'प्री-कैंसरियस फिबरॉइड' होता है। जो गर्भाशय के टिशु मसल्स में ग्रो होता है। 20% से 80% महिलाओं में 50 साल की उम्र तक ये फिबरॉइड डेवलप हाेता है।

- फिबरॉइड के दौरान हैवी ब्लीडिंग, पेट में दर्द, पेट का निचला हिस्सा बढ़ना, बार-बार टॉयलेट आना, सेक्स के दौरान दर्द और पीठ के निचले हिस्से में दर्द के सिमटम्स दिखाई देने लगते हैं। इस केस में प्रेग्नेंट होने की संभावना न के बराबर होती है।
- डॉक्टर्स ने नीना को बताया कि उसके फिबरॉइड को कई तरह की मेडिसिन या सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। इसके बाद नीना ने प्रेग्नेंसी की बात दिमाग से निकाल दी और फिबरॉइड के ट्रीटमेंट के बारे में साेचने लगी। नीना ने इलाज के लिए लीच थैरेपी को चुना।

कैसे हुआ लीच थैरेपी से इलाज?
- नीना बताती है कि वह लिथुआनिया में पैदा हुई थी और उस कल्चर में हर सामान्य बीमारी के इलाज में लीच थैरेपी का इस्तेमाल होता है। ये ब्लड फ्लो बढ़ाने और स्किन प्रॉब्लम से दूर रखता है।
- 2008 में नीना ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग जाकर ट्रीटमेंट शुरू कराया। वहां डॉक्टर्स ने लीच यानी जोंक को नीना के गर्भाशय के निचले हिस्से (cervix) में इन्सर्ट कर दिया।
- cervix वो एरिया होता है, जहां ब्लड का फ्लो सबसे ज्यादा होता है। डॉक्टर्स एक प्लास्टिक डिवाइस (स्पेकलम) की मदद से नीना के प्राइवेट पार्ट में हर दिन तीन जोंक को डालते थे। इस ट्रीटमेंट में करीब 500 जोंक का इस्तेमाल हुआ।

- यहां जोंक ब्लड के टॉक्सिन को चूस लेती है। इससे बॉडी में ब्लड की सप्लाई फास्ट हो जाती है। वहीं, जोंक की लार ब्रेन में हॉरमोंस रिलीज करती है, इससे रिकवरी और तेजी से होती है।

- नीना ने बताया, "मैंने सात दिन के भीतर खुद नोटिस किया कि बॉडी पहले से ज्यादा रिलेक्स थी और अगले ही कुछ दिनों में मेरे पीरियड्स का टाइम एकदम सही हो गया। इसके अलावा मुझे संभोग की तीव्र इच्छा होने लगी थी और मैं काफी देर तक संभाेग करने के लिए कैपेबल हो गई।

अचानक मिली प्रेग्नेंसी की खुशी

- नीना बताती हैं ,"जून 2009 में करीब आठ महीने की जोंक थैरेपी के बाद मेरी लाइफ बदल गई। मैंने पीरियड्स मिस कर दिए थे। जांच कराने पर मुझे प्रेग्नेंट बताया गया। मेरे फिबरॉइड की जांच की गई तो वह भी लगभग खत्म हो चुका था।"
- "जब बच्चा मेरे पेट में पल रहा था, तब भी मैंने थैरेपी बंद नहीं की, मुझे डर था कि कहीं अचानक मुझे वापस बीमारी आकर न घेर ले। जब बेटा हुआ तब भी मैंने इसे चालू रखा, क्योंकि मैंने रिसर्च किया था कि इससे ब्रेस्ट में मिल्क प्रोडक्शन ज्यादा होता है।"
- बता दें कि नीना मॉडर्न लीच थैरेपी की पॉयनियर में से एक है। वह इन दिनों ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ हिरूडोथैरेपी की डायरेक्टर है। उसकी संस्था को ब्रिटिश सरकार ने वैलिड कॉॅम्प्लिमेंट्री थैरेपी ऑर्गेनाइजेशन करार दिया है।

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