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जानवरों के अंदर बम से लेकर सॉफ्ट ड्रिंक बमों से हमला, आतंकवादियों के 5 डर्टी वेपन

एंटी टेररिज्म डे पर हम आपको आतंकवादियों के ऐसे ही पांच डर्टी वेपन के बारे में बता रहे हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 21, 2018, 07:09 PM IST

    • इंटरनेशनल डेस्क. कभी कोई प्लेन इमारत से आकर टकरा गई तो कभी किसी ट्रक ड्राइवर ने राह चलते लोगों को कुचलना शुरू कर दिया। किसी ने सोचा नहीं था कि आतंकवादी गाड़ियों को भी हथियार बना लेंगे। फ्रांस के नीस में एक ट्रक से 84 लोगों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया गया था। इंग्लैंड में भी ऐसी ही घटना हुई। आतंकवादी अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए नए-नए डर्टी वेपन का इस्तेमाल कर रहे हैं. 21 मई, 1991 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या श्रीलंका के आतंकवादियों ने कर दी थी। तभी से हर साल 21 मई को एंटी टेररिज्म डे मनाया जाता है। एंटी टेररिज्म डे पर हम आपको आतंकवादियों के ऐसे ही पांच डर्टी वेपन के बारे में बता रहे हैं।

      बायोलॉजिकल हथियार

      डिस्कवर मैग्जीन में छपी 'आतंकी हथियारों से संभावित जोखिम' रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों ने ऐसे-ऐसे हथियारों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है जो डरावना है। बायोलॉजिकल बमों को दुनिया का सबसे खतरनाक हथियार माने जाना लगा है। ये भी एक ऐसा खतरा है जिससे निपटने के तरीके खोजन में पूरी दुनिया लगी हुई है। ऐसे हथियारों का इस्तेमाल भी आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए हो सकता है। बायोलॉजिकल बम का मतलब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस, जहरीले जीव या पदार्थों का उपयोग इंसानों के खिलाफ करना। प्राचीनकाल में दुश्मनों को हराने के लिए इसी तरह से गंभीर बीमारियां फैलाई जाती थीं, लेकिन इससे हमला करने वाले भी नहीं बच पाते थे। ये बहुत तेजी से फैलते थे और सबकुछ तबाह कर देते थे। सीरिया और इराक में ऐसे बमों के इस्तेमाल की आशंका जताई गई।

      रेडियोलॉजिकल बमों से हमला

      - बायोलॉजिकल बमों की तरह दूसरा बड़ा खतरा हैं रेडियोलॉजिकल बम, जिन्हें आतंकी इस्तेमाल करने की फिराक में रहते हैं।

      दुनिया में रेडियाएक्टिव पदार्थों के कई सोर्स मौजूद हैं। इसमें से कई मेडिकल और इंडस्ट्रीयल क्षेत्रों में उपयोग किए जाते हैं। हमारे लिए भले ही बहुत काम के हों पर ऐसे रेडियोएक्टिव पदार्थों से बेहद खतरनाक रेडियोलॉजिकल डिसपर्सल डिवाइस (RDD) बनाया जा सकता है। इसे डर्टी बम भी कहा जाता है। सीधे तौर पर कहें तो ये ऐसे बम होते हैं जिसमें रेडियोएक्टिव एनर्जी या रेडिएशन को तोड़ मरोड़ कर एक भयानक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। Wire की रिपोर्ट के मुताबिक कोबाल्ट, सीजियम, स्ट्रोन्टियम और इरिडियम ऐसे रेडियोएक्टिव मटेरियल है जिनका इस्तेमाल आतंकी इंसानों के खिलाफ गलत तरीके से कर सकते हैं। इसका सबसे बड़ा खतरा ये है कि इनकी रेडिएशन सैकड़ों सालों तक रह सकती है।

      सॉफ्ट ड्रिंक बमों से हमला

      - Gizmodo की रिपोर्ट के मुताबिक 2006 में अल कायदा के आतंकी सॉफ्ट ड्रिंक बम से हमला करने की फिराक में थे पर सफल नहीं हुए। रिपोर्ट के मुताबिक एनर्जी ड्रिंक की बॉटल में ट्राइसेटोन ट्राइपेरोक्साइड (TATP) नामक तरल विस्फोटक भरा जाता है। ये विस्फोट इतना सेंसिटव होता है कि जरा सी गर्मी या घर्षण से भयानक विस्फोट करता है। इसे कोल्ड ड्रिंक में मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कोल्ड ड्रिंक में मिलने के बाद मोबाइल या किसी तरह की कैमरा बैटरी से भी इसमें विस्फोट किया जा सकता है।

      जानवरों पर बम लगाना

      - गिजमोडो की एक और रिपोर्ट के मुताबिक 2008 में अलकाया ने दो कुत्तों के अंदर बम फिट कर एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट पर हमला करने की प्लानिंग की थी, लेकिन फ्लाइट पर पहुंचने से पहले ही बमों में धमाका हो गया और दोनों जानवर मारे गए।

      अंडरवियर बम

      - 2009 में क्रिस्मस के मौके पर 23 साल का आतंकी उमर फारुख घाना से एम्सट्रेडम आया। यहां से उसने डेट्रोइट के लिए नॉर्थ वेस्ट एयरलाइन्स की फ्लाइट 253 पकड़ी। उमर अंडरवियर बम के साथ बैठा था। उसने अपने अंडरवियर में (PETN) विस्फोटक और उसे डेटोनेट करने के लिए एक कंडोम में रिएक्टिव लिक्विट भर रखा था। सुरक्षा जांच से उमर बच निकला और फ्लाइट में धमाका करने के लिए तैयार था, लेकिन तभी उमर से चूक हो गई और उसके कमर के निचले हिस्से और प्लेन की दीवार पर आग लग गई। इसके बाद बाकी पैसेंजर्स ने उमर को पकड़ लिया और फ्लाइट अटेंडेंट ने आग बुझाने के बाद इमरजेंसी लैंडिंग कराई। उमर पर 289 लोगों की हत्या करने के प्रयास का मामला दर्ज हुआ। अंडरवियर बम को आज भी बेहद खतरनाक आतंकी हथियार माना जाता है जिसे आसानी से डिटेक्ट नहीं किया जा सकता।

      बढ़ता जा रहा है आतंकवाद का खतरा

      आतंकवाद से भारत लगातार जूझ रहा है। हमने हर इंटरनेशनल मंच पर इसके खिलाफ आवाज़ उठाई है। लेकिन ऐसा नहीं है कि हम ही आतंकवाद को भुगत रहे हैं। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में दुनियाभर में 11,072 आतंकी हमले हुए। इनका नतीजा 25,600 लोगों की मौत के तौर पर सामने आया। वहीं इन हमलों में करीब 33,800 लोग जख्मी हुए थे। ग्लोबल टेरेरिज्म डाटाबेस के मुताबिक, 2016 में 75 फीसदी आतंकी हमले सिर्फ दुनिया के 10 देशों में हुए। इसकी 2017 की रिपोर्ट में आतंकवाद से जूझ रहे टॉप 50 देशों की रैंकिग दी गई है, जिसमें इराक सबसे ऊपर है। इसके बाद अफगानिस्तान, नाइजीरिया, सीरिया और पाकिस्तान के नाम आते हैं। इराक में 2016 आतंकवाद के लिए सबसे बुरा साल रहा। यहां इस साल 2965 आतंकी हमलों 2803 से ज्यादा मौतें हुईं। 2015 की तुलना में ये 40 फीसदी ज्यादा मौतें थीं.

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