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मां की पीड़ा: बेटी को मारने वाला खुलेआम घूम रहा है, हम थाने के चक्कर लगा रहे हैं, पुलिस फोन तक नहीं उठा रही

3 वर्ष पहले
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ग्वालियर. जिस घर से हमेशा खिलखिलाने की आवाज आती थी। उस घर में पिछले दस दिन से उस मां का रुदन सुनाई देता है। 07 मई को मां की आंखों के सामने उसकी बच्ची को तेज रफ्तार कार ने कुचल दिया था। यह मां बेटी पलक की तस्वीर को दिनभर निहारती रहती है। कभी उसका बस्ता सीने से लगाती है तो कभी उसकी कॉपी और किताबों में उसे ढूंढती है। पुलिस के रवैए से टूटती जा रही है एक मां...


- जिस तेज रफ्तार कार ने उसके दिल का टुकड़ा हमेशा-हमेशा के लिए उससे दूर कर दिया, उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने की उम्मीद भी पुलिस के रवैए से टूटती जा रही है।

- पलक की मौत के दस दिन बाद भी पुलिस अभी तक कार ड्राइवर की पहचान तक नहीं कर पाई। पलक की मां बस यही सवाल पूछती है कि क्या उसकी बेटी को न्याय मिलेगा।

 

थाने की रीना मैडम मुझसे कहती हैं कि सीएम हेल्पलाइन में की गई शिकायत वापस ले लो...

- मृतक पलक की मां मंजू ने कहा, मेरी बेटी को मारने वाला खुलेआम घूम रहा है। कंपू थाने के चक्कर लगा लगाकर थक चुकी हूं। सिर्फ एक जवाब मिलता है कि छानबीन कर रहे हैं।

- हम गरीब हैं, कोई बड़ा आदमी होता तो पुलिस खुद आगे बढ़कर काम करती। मैंने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की तो एसआई रीना मैडम मुझ पर ही दबाव बना रही हैं कि शिकायत वापस ले लो।

- मेरी बच्ची चली गई लेकिन जांच करने वाली मैडम कहती हैं कि हमें परेशान मत करो। मेरा फोन तक उठाना बंद कर दिया। हमसे ही पुलिस कहती है आप खुद जाकर छानबीन करो। मेरी बेटी तो चली गई, क्या उसे न्याय मिलेगा।

 

पुलिस की जांच पर सवाल: 5 मिनट में दे दी 2 कारों को क्लीन चिट

- पलक को सफेद रंग की बिना नंबर वाली आई-20 कार ने कुचला था। कार सीसीटीवी फुटेज में नजर आई थी। पुलिस ने हाल ही में खरीदी गई बिना नंबर की आई-20 कार की सूची निकलवाई, जिसमें 39 नई कार खरीदी गई थीं। इसमें सफेद रंग की 25 कार थीं।

- पुलिस ने कार मालिकों की सूची निकलवाई इनसे संपर्क किया और सभी को थाने बुलाया। पुलिस का दावा है कि अभी तक 20 कार की जांच की लेकिन कोई नहीं निकला।

- पुलिस की जांच की हकीकत जानने के लिए बुधवार को दैनिक भास्कर रिपोर्टर कंपू थाने पहुंचा। इसी समय सफेद रंग की आई-20 कार लेकर दो लोग आए।

- एसआई रीना शाक्य ने दोनों कार 5 मिनट में देखीं। नाम, पता और मोबाइल नंबर नोट कर उनको जाने दिया।

 

काम पर जाने का मन नहीं करता, दूध तक के पैसे नहीं थे, तब जाना पड़ा
- पित संजय ने कहा, जब से बेटी गई है, तब से सबकुछ चला गया। काम तक करने का मन नहीं करता। अब एक ही ख्वाहिश है बेटी को मारने वाले को सलाखों के पीछे देखना। घर में दूध तक के पैसे नहीं थे, इसलिए मजबूरी में काम पर जाना पड़ा। मैं सुबह भी थाने गया लेकिन बस वही जवाब जांच चल रही है।

 

एक्सपर्ट व्यू- ऐसे होनी चाहिए थी पड़ताल

 

- सबसे पहले घटना के तत्काल बाद ब्लड सैंपल, टायर के निशान एकत्र कर फोरेंसिक एक्सपर्ट से जांच करानी चाहिए थी।

- हादसे के बाद कार भी क्षतिग्रस्त हुई होगी, सभी वर्कशॉप को सूचित किया जाना चाहिए था कि ऐसी कोई भी कार आए तो तत्काल बताएं। जिस आधार पर कार वालों को सूचीबद्ध कर जांच के लिए बुलाया है, उनकी कार से टायर के निशान मैच किए जा सकते थे।

- जहां हादसा हुआ, वहां से पहले के सीसीटीवी फुटेज देखे जाने चाहिए थे। जिन कार को जांच के लिए बुलाया, उनकी बारीकी से जांच होनी चाहिए थी। उन कार के हर हिस्से के फोटो पुलिस को लेने चाहिए।

 

जांच में कहां खामी, समीक्षा करूंगा
- एसपी नवनीत भसीन ने कहा, बच्ची के मौत के मामले में अभी तक टक्कर मारने वाली कार तक क्यों नहीं पहुंच पाए मैं दिखवाता हूं। जांच में कहां खामी रही इसकी भी समीक्षा करूंगा। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।