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डाउनलोड करेंडूंगरपुर(कोटा). खुद जन्म से ही दृष्टिहीन, पत्नी भी दोनों पैरों से दिव्यांग, खड़ी तक नहीं हो सकती है। एकमात्र 6 साल का बेटा ही इन दोनों का सहारा बना हुआ है। बेटा पानी लाए तो ये दोनों पी सकते हंै, बेटा दुकान से सामान लाए तो ये लोग खा सकते हैं, लेकिन किसी और से कोई भी मदद नहीं मिलती है।
यह हर रोज की कहानी है लोलकपुर ग्राम पंचायत, दोवड़ा पंचायत समिति के अधीन चकवीरी गांव में रहने वाले जीवा पुत्र कोदरा रोत और उसकी पत्नी गीता की। इस परिवार को एक साल पहले तक अंत्योदय योजना के तहत हर माह 35 किलो गेहूं का वितरण राशन से होता था, लेकिन पंचायत समिति से इस परिवार को अंत्योदय से बीपीएल योजना में ट्रांसफर कर दिया। इस कारण अब प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं का वितरण होता है। इस तरह से 15 किलो गेहूं से ही इस परिवार को महीने तक गुजारा करना पड़ता है। बाकी इनके पास न तो जमीन है और न ही कोई और सहारा है, जिससे यह परिवार अपना गुजारा चला सके।
पड़ोसी से पालनहार योजना में आवेदन कराया, अब तक कोई जवाब नहीं
दूसरी ओर जीवा रोत ने बताया कि उसके एक मात्र बेटे मयूर के लिए पालनहार योजना के तहत आवेदन कराया था, लेकिन आज तक आवेदन का क्या हुआ है, इसकी जानकारी तक किसी ने नहीं दी है। दो साल पहले ही आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत हुआ था। ग्रामीणों के सहयोग से मकान तो बना लिया है, लेकिन बाद में गुजारे के लिए उसके पास कुछ नहीं है। ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव से कोई भी सहयोग नहीं मिलता है।
सरकार कम से कम एक हैंडपंप घर के पास लगवा दे
जीवा रोत की पत्नी गीता ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या पानी की होती है। क्योंकि अकेला बेटा पानी ला नहीं सकता है। ऐसे में सरकार एक हैंडपंप घर के आसपास खुदवा दे तो कम से कम पानी की सुविधा तो मिल जाएगी। चचेरे परिजन सोहन रोत ने बताया कि केवल वृद्धावस्था पेंशन के रूप में साढ़े 700 रुपए मिलते हैं, लेने के लिए डूंगरपुर जाना पड़ता है।
इनकी पानी की समस्या का समाधान आगामी 15 दिनों में कर दिया जाएगा। हम प्रयास कर हैंडपंप खुदवा देंगे, ताकि पानी की समस्या का समाधान हो जाएगा। बाकी राशन को लेकर है तो हम प्रस्ताव बनाकर रसद विभाग को भेजेंगे। - योगेंद्रसिंह चौहान, सचिव, लोलकपुर ग्राम पंचायत
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