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डाउनलोड करेंबांसवाड़ा(जोधपुर). मुस्लिम कॉलोनी स्थित बांसफोड़ मोहल्ले में घर के पास खेल रहे 9 माह के बच्चे की बुधवार को नाले में डूबने से मौत हो गई। इसमें लापरवाही आरयूआईडीपी के ठेकेदार की सामने आ रही है। यहां पक्का नाला बनाने के लिए आठ दिन से नाले का बहाव बंद रखा था। जिससे पानी इकट्ठा हो गया। बच्चा खेलते-खेलते इसमें गिरा गिरा और उसकी मौत हो गई। घटना सुबह 9:30 बजे की है। ये था पूरा मामला...
- बजरंग कटारा का 9 महीने का बेटा बाबू वॉकर से आंगन में खेल रहा था। भीतर परिजन काम कर रहे थे। बाबू खेलता हुआ घर से सटे नाले में जा गिरा। उसे 9 साल की चचेरी बहन शिक्षा ने देख लिया।
- शिक्षा चिल्लाई और दौड़कर बाबू के पिता बजरंग को बताया। बजरंग ने देखा कि कीचड़ में वॉकर पड़ा था। वॉकर को उठाने गया तो उसमें बेटे बाबू के पैर नजर आए।
- उसने बाबू को बाहर निकाला और एमजी अस्पताल लेकर गया लेकिन जांच के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
- बजरंग का लकड़ी का कारोबार है और उसका इकलौता लड़का था बाबू। इस तरह घर के बगल में ही उसकी मौत से पूरा मोहल्ला सकते में आ गया।
संतान के लिए रखेे थे कई व्रत
22 वर्षीय बजरंग और उसकी 20 वर्षीय पत्नी किरण ने बच्चे के लिए मन्नत मांगी थी। रातीतलाई के महादेव में उन्होंने संतान होने पर हर सोमवार को व्रत करने और नारियल चढ़ाने की मन्नत ली थी। 9 महीने पहले बाबू का जन्म होने पर पूरे परिवार में खुशी का माहौल बन गया था। लेकिन उन्हें पता नहीं था कि इन खुशियों को बहुत जल्दी नजर लगने वाली थी। तीन भाइयों के परिवार में दूसरा बेटा होेने पर सभी खुश थे। हादसे के बाद पूरा परिवार सदमे में आ चुका है।
पिता ने तलाशा तो नाले में बेटे के पैर नजर आए, अस्पताल दौड़े, पर बचा नहीं पाए
जहां बाबू डूबा उस नाले में इतना पानी जमा नहीं रहता था कि कोई डूब जाए लेकिन आरयूआईडीपी यहां पक्का नाला बनवा रहा है। इसके लिए नाले के पानी का बहाव क्षेत्र बदलने के लिए नाला गहरा कर दिया था। जिससे बजरंग के घर के समीप नाले में पानी जमा हो गया था। जिसमें बाबू डूब गया। बजरंग के बड़े भाई रमेश ने बताया कि परिषद ने नाला बनाने के लिए 10 दिनों से गड्डा खोद रखा था। जिससे पानी भर गया। काम भी बीते 5 दिनों बंद कर रखा है। उनका आरोप है कि बाबू की मौत के लिए आरयूआईडीपी का काम करवाने वाले ठेकेदार भूपेन्द्रसिंह जिम्मेदार है।
उसने गड्डा खोदने के बाद भी सुरक्षा के लिए कोई बंदोबस्त नहीं किए। शहर में इन दिनों आरयूआईडीपी की और से 14 करोड़ की लागत से 11 नालों को पक्का बनाया जा रहा है। जिसमें कई जगह ठेेकेदार नाले का रुख मोड़ रहे हैं लेकिन सुरक्षा के एहतियाती बंदोबस्त की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। नाले निर्माण की धीमी रफ्तार से भी स्थानीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। बीते दिनों नाथेलाव कॉलोनी में भी स्थानीय लोगों ने मनमर्जी से नाला निर्माण करने की शिकायत की थी। शहर की कई कॉलोनियों में ऐसे खुले नाले हैं जो आबादी के बीच से हाेकर निकल रहे हैं।
ठेकेदार बोला: पानी आगे बह रहा, मकान ही नाले पर बना है
सवाल: पानी का बहाव मोड़ने गहरा गड्ढा खोद दिया, जिसमें पानी जमा होने से हादसा हुआ?
ठेकेदार: ऐसा नहीं है, पानी आगे तक बह रहा है। घर ही नाले पर है। ऐसे में गिरने की आशंका बनी रहती है।
सवाल: नाले का काम 10 दिन से बंद था। समय पर काम किया होता तो हादसा नहीं होता।
ठेकेदार: नाले का काम लगातार किया जा रहा है। बुधवार को आखातीज होने से काम बंद था।
सवाल: नाले का काम चल रहा है ऐसे में फेसिंग क्यों नहीं की
ठेकेदार: मुख्य मार्ग पर काम होता तो फेसिंग करते, यहा तो एक तरफ कब्रिस्तान है।
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