पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंजयपुर. केंद्र सरकार ने किशोरों से होने वाले अपराधों के मामलों की जल्दी सुनवाई के लिए किशोर न्याय एक्ट लागू कर रखा है। इसी एक्ट के तहत हर जिले में एक किशोर न्याय बोर्ड भी गठित है। फिर भी प्रदेश भर में 9 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं। इनमें एक हजार से अधिक मामलों में किशोरों को न्याय का इंतजार करते हुए पांच साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। पेंडिंग केसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने जल्दी निस्तारण के निर्देश दे रखे हैं, लेकिन न्याय की प्रक्रिया धीमी ही चल रही है। लंबित मामलों में जयपुर पहले नंबर पर है। श्रीगंगानगर दूसरे और सवाईमाधोपुर जिला तीसरे नंबर पर है। अकेले जयपुर में ही एक हजार से अधिक मामलों में निर्णय होना है। ये लंबित मामले चोरी से लेकर हत्या तक के गंभीर अपराधों के हैं।
- किशोर न्याय बोर्ड 18 साल से कम आयु के किशोरों के हाथों होने वाले अपराधों की सुनवाई करता है। बोर्ड ही प्रारंभिक जांच के बाद यह तय करता है कि किशोर अपराधी को पुनर्वास के लिए भेजा जाए या उस पर किसी बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाए।
- विधानसभा में पेश एक आंकड़े के मुताबिक बोर्डों में सभी जिलों में कुल 9,338 मामले लंबित हैं। इनमें से 1068 मामलों को तो 5 साल से अधिक हो गए। लंबित प्रकरणों का मामला विधानसभा के बजट सत्र में भी उठ चुका है। यह मामला भाजपा के ही विधायक अभिषेक मटोरिया और मंजू बाघमार उठाया था।
यह होता है किशोर न्याय बोर्ड
- किशोर न्याय एक्ट-2015 की धारा 4 के अंतर्गत आदर्श नियम-2016 के अनुसार राज्य के प्रत्येक जिले में विधि से संघर्षरत बच्चों के मामलों की जांच, सुनवाई और निस्तारण के लिए एक या अधिक किशोर न्याय बोर्ड का गठन किया जाना अनिवार्य है। यह बोर्ड एक महानगर मजिस्ट्रेट/ प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट और 2 सदस्य (जिसमें एक महिला हो) से बनी एक न्यायपीठ होती है। प्रत्येक किशोर न्याय बोर्ड को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में प्रदत्त महानगर मजिस्ट्रेट/प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्राप्त होती है। बोर्ड में जो दो सदस्य होते हैं, वे सामाजिक कार्यकर्ता होते हैं और उनका चयन एक तय प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।
किशोर न्याय बोर्ड में बड़ी संख्या में मामले पेंडिंग है। मैंने विधानसभा में भी यह मामला उठाया था, ताकि सरकार की नजर में आ सके। मैं अपने स्तर पर संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर मामलों के जल्दी निस्तारण के प्रयास कर रहा हूं।
-अभिषेक मटोरिया, भाजपा विधायक, नोहर
कई लोग बच्चों से भिक्षावृत्ति व लेबर का काम कराते हैं। हम ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर बच्चों को मुक्त कराते हैं।
- नरेंद्र सिखवाल, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति
कई बार गवाहों की तामील नहीं हो पाती है। इसलिए मामले पेंडिंग पड़े रहते हैं। वैसे हम प्रयास करते हैं कि बच्चों को जल्दी राहत मिले। छोटे मामलों में तो समझाइश से काम लेते हैं। उनको सुधार गृह भी भेज देते हैं।
- ममता शर्मा, सदस्य, किशोर न्याय बोर्ड जयपुर द्वितीय
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.