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सुप्रीम कोर्ट का लोकतंत्र में सादगी घोलने वाला फैसला

सुप्रीम कोर्ट का चुनावी उम्मीदवारों को आय के स्रोत भी घोषित करने की हिदायत देकर चुनाव सुधार की दिशा में अहम कदम।

Danik Bhaskar | Feb 17, 2018, 05:18 AM IST
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी उम्मीदवारों को सिर्फ आय ही नहीं आय के स्रोत भी घोषित करने की हिदायत देकर चुनाव सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर की पीठ से आया यह अहम फैसला गैर-सरकारी संगठन ‘लोकप्रहरी’ की याचिका पर आधारित है, जिसकी चिंता यह थी कि विधायक/सांसद बनने के बाद जनप्रतिनिधियों की आय कैसे कई गुना बढ़ जाती है। निश्चित तौर पर विधायक या सांसद बनने से पहले और बाद में किसी राजनेता की आय की तुलना होनी चाहिए और कोई मानक भी निर्धारित किया जाना चाहिए कि आय में कितनी फीसदी बढ़ोतरी उचित है। याचिका में शामिल एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेकिट रिफॉर्म (एडीआर) ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि लोकसभा के चार सासंदों की आय में 12 गुना और 22 की आय में पांच गुना बढ़ोतरी हुई है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं और उनकी कुल संपत्ति 177 करोड़ रुपए की है, जबकि माणिक सरकार मात्र 26 लाख की संपत्ति के साथ देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री हैं। अदालत के आदेश के तहत जन प्रतिनिधि को न सिर्फ अपनी आय के स्रोत बताने होंगे बल्कि अपनी पत्नी और बेटा-बहू, बेटी-दामाद की आय के साथ उनके स्रोत भी घोषित करने होंगे। इस पहल का अच्छा प्रभाव तभी पड़ेगा जब पद का दुरुपयोग करते हुए बेहिसाब संपत्ति बनाने वाले राजनेताओं पर कार्रवाई के साथ समाज भी उन नेताओं को अहमियत दे जो अपना जीवन धन और सत्ता अर्जित करने की बजाय सेवा को समर्पित करते हैं। ऐसे में अगर इस समय त्रिपुरा के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके माकपा नेता माणिक सरकार की सादगी और गरीबी लोकतांत्रिक कसौटी पर है तो देश में ईमानदारी और लोकपाल की स्थापना के लिए राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों का सादगी को छोड़ना विडंबनापूर्ण। उन्होंने क्राउड फंडिंग के माध्यम से बहुत सारा चंदा जमा किया और कानूनी बाध्यता न होने के कारण उसका स्रोत नहीं बताया। जहां तक कांग्रेस और भाजपा जैसी बड़ी पार्टियों की बात है तो उनके चंद लोगों को छोड़कर बाकी के लिए आय के स्रोत और सादगी का मामला आचरण से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप के औजार हैं। मौजूदा फैसले की असली सार्थकता तो तब होगी जब लोकतंत्र धनतंत्र के दबाव से मुक्त हो और सादगी का सम्मान हो।