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कौशल विकास ट्रेनिंग के बाद 17 फीसदी को ही रोजगार क्यों?

देश से शाॅर्ट टर्म प्रशिक्षण प्राप्त 27,58,894 युवाओं में से केवल 4,93,018 यानी मात्र 17.87 प्रतिशत को ही रोजगार।

मोनिका सरोडिया | Last Modified - Feb 17, 2018, 05:20 AM IST

कौशल विकास ट्रेनिंग के बाद 17 फीसदी को ही रोजगार क्यों?

2010 में जब यूपीए सरकार ने राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की स्थापना की थी तो लगा था कि अब देश में बेरोजगारी की समस्या कुछ हद तक दूर हो जाएगी। 2015 में एनडीए ने भी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 2022 तक 40 करोड़ युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार देने की शुरुआत की थी। अलग से गठित कौशल विकास एवं आंत्रप्रेन्योरशिप मंत्रालय का 2017 में ही बजट 3000 करोड़ रुपए से अधिक था। विश्व बैंक ने भी भारत में कौशल विकास मिशन के लिए 25 करोड़ डाॅलर मंजूर किए हैं।
किंतु चालू वर्ष के रोजगार के आंकड़े निराशाजनक हैं। योजना के तहत देशभर से शाॅर्ट टर्म प्रशिक्षण प्राप्त 27,58,894 युवाओं में से केवल 4,93,018 यानी मात्र 17.87 प्रतिशत को ही रोजगार मिल पाना मिशन की खामियां दर्शाता है। एक तरफ हमारे 3,291 इंजीनियरिंग काॅलेजों की 16 लाख सीटों में से 51 प्रतिशत सीटें खाली जा रही हैं और शेष में से भी 30 प्रतिशत ही रोजगार पा रहे हैं तो वहीं आईटीआई और पाॅलिटेक्निक संस्थाओं से निकले विद्यार्थियों का भी बुरा हाल है। यूनेस्को के अनुसार 2022 तक भारत में 47 करोड़ युवाओं की वर्कफोर्स होगी और विश्व का हर पांचवां युवा भारतीय होगा। जब हम युवाओं को रोजगार के लिए एक विशेष कोर्स करा रहे हैं तो फिर 100 प्रतिशत प्लेसमेंट की गारंटी क्यों नहीं दे पा रहे हंै? क्या ये मिशन भी भ्रष्टाचार की भंेंट चढ़ रहा है? क्यों न हम जापान, जर्मनी, जैसे देशों की तरह 8वीं व दसवीं के बाद विद्यार्थियों की विशेष काउंसलिंग करके उन्हें मार्गदर्शन दें।
आज एनएसडीसी, यूजीसी और एआईसीटीई जैसी संस्थाओं को बी.वाॅक (बैचलर आॅफ वोकेशन) या बी. स्किल (बैचलर आॅफ स्किल्स) जैसे कोर्स शुरू करवाने चाहिए, जिसमें विद्यार्थी 12वीं के बाद एक वर्ष में डिप्लोमा, दो वर्ष बाद एडवांस्ड डिप्लोमा और तीन वर्ष बाद स्किल डेवलपमेंट में स्नातक की डिग्री प्राप्त कर सकंे और उद्योगों की मांग के अनुसार वर्कफोर्स तैयार हो। इससे विद्यार्थी को स्नातक की डिग्री मिलेगी और लर्न विद अर्न के साथ देश के विकास में योगदान भी दे सकेगा।

मोनिका सरोडिया, 19
स्कूल ऑफ इलेक्ट्रिकल स्किल्स इंडियन स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी, जयपुर

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