संपादकीय

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भारत की नीति को संतुलित करेगी प्रधानमंत्री की यात्रा

मध्य-पूर्व में बिगड़ते राजनयिक समीकरणों में भारत के हस्तक्षेप का प्रयास भी है।

Danik Bhaskar

Feb 09, 2018, 02:49 AM IST

विरोधियों को चौंकाने और चौखटे से बाहर जाकर कदम उठाने में माहिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संयुक्त अरब अमीरात, फिलीस्तीन और ओमान के लिए होने वाला तीन दिवसीय दौरा भारत की पारंपरिक विदेश नीति को नए संदर्भ में परिभाषित करने का प्रयास है। यह फिलीस्तीन और इजराइल के बीच भारत के रिश्तों को संतुलित करने का कदम तो है ही, साथ ही मध्य-पूर्व में बिगड़ते राजनयिक समीकरणों में भारत के हस्तक्षेप का प्रयास भी है।

भारत फिलीस्तीन का तब से समर्थक है जब इजरायल का गठन किया गया था। भारत के स्वाधीनता संग्राम के महान नेताओं ने यहूदियों के पक्ष में हमदर्दी जताते हुए भी फिलीस्तीनियों के साथ अन्याय का विरोध किया था। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिलीस्तीन और इजरायल के साथ अपनत्व प्रदर्शित करने की कोशिश कर रहे हैं तो इसके पीछे हमारी वही संतुलित मानवतावादी विदेश नीति है।

इस संदर्भ में मोदी की तारीफ करनी चाहिए कि अगर वे इजरायल का दौरा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बने तो फिलीस्तीन का भी दौरा करने वाले भी पहले ही हैं। इससे पहले भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस प्रस्ताव के विरोध में मतदान भी किया जिसमें तेल अवीव की जगह यरुशलम को इजरायल की राजधानी घोषित कर दिया गया। फिलीस्तीनी राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास जब इजरायल से होने वाले सारे पुराने समझौतों को रद्द करने की बात कर रहे हैं तो भला नए को कैसे स्वीकार करेंगे? ऐसे में भारत का प्रयास कोई स्वीकार्य रास्ता निकालने का हो सकता है। ओमान पहली बार और संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर दूसरी बार जा रहे प्रधानमंत्री मोदी का मकसद इन देशों के साथ रणनीतिक और व्यावसायिक रिश्ते मजबूत करने और अमीरात से पिछले साल हुए समझौतों को साकार करने का है। इन देशों से भारत का पुराना रिश्ता तो है ही, यहां भारतीयों और विशेष तौर पर गुजरातियों की अच्छी संख्या है। यह देश हिंद महासागर तटवर्ती संघ (आईओआरए) के सदस्य भी हैं और उनकी उपयोगिता ऊर्जा संबधी सहयोग और आतंकवाद विरोधी अभियान के लिए है। इस दौरे से भारत मालदीव में उभरते भारत विरोधी राजनीतिक वातावरण को भी नियंत्रित कर सकता है और भारत को इस्लामी देशों के करीब साबित करके पाकिस्तान और घरेलू राजनीति पर भी प्रभाव डाल सकता है।

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