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जरूरत न्याय के प्रशासनिक मसलों में सरकारी सक्रियता की

सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष न्यायाधीशों का प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘लोकतंत्र को बचाने की अपील’ करना चिंता का विषय है।

achit pandya | Last Modified - Jan 18, 2018, 04:59 AM IST

  • जरूरत न्याय के प्रशासनिक मसलों में सरकारी सक्रियता की
    रचित पंड्या, 27 एमएससी, राजस्थान यूनिवर्सिटी जयपुर

    आमतौर पर आदमी घर-आंगन से लेकर खेतों के विवादों में यूं ही कह देता है, ‘मैं सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगा’। यह भारतीयों में न्यायपालिका के प्रति मजबूत भरोसे का सबूत है। किंतु, बीते दिनों की घटना ने कहीं न कहीं न्यायिक-प्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाया है। सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष न्यायाधीशों का प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘लोकतंत्र को बचाने की अपील’ करना चिंता का विषय है। यह बहुत ही अप्रिय स्थिति है।


    हम हमेशा से ही ‘न्यायिक-सक्रियता’ की प्रशंसा करते आए हैं, जिसमें न्यायपालिका सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप कर जनता के कल्याण में फैसले देती है। अब आवश्यकता है ‘सरकार-सक्रियता’ की। आशय यह है कि सरकार को चाहिए न्यायपालिका में उठने वाले प्रशासनिक मसलों का हल करे, क्योंकि चार वरिष्ठ न्यायाधीशों की शिकायत प्रशासनिक मुद्‌दों पर है। खासतौर पर रोस्टर को लेकर। ज्यादा समय तक ऐसी स्थिति का बना रहना ठीक नहीं है। प्रथमदृष्टया राष्ट्रपति व कानून-मंत्री के समक्ष भी इस प्रश्न को रखा जा सकता था। यहां लोकतंत्र पर कोई खतरा नज़र नहीं आ रहा है। चूंकि चार न्यायाधीशों के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश रोस्टर को लेकर अपने विशेषाधिकार का दुरुपयोग कर रहे हैं तो इसे मिल-बैठकर सहमति से भी हल किया जा सकता है। ऐसे में सरकार को राष्ट्रहित में भूमिका निभानी चाहिए।


    ये विवाद के दौरान चर्चा में आए सभी मुद्‌दे न्यायिक क्षेत्र के तकनीकी मुद्‌दे हैं और आम लोगों की समझ से परे हैं। लेकिन, सीधे लोकतंत्र को खतरे में बताना न्याय की सर्वोच्च संस्था के प्रति नागरिकों में नकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करता है। फिलहाल देश मे संवेनदशील मामले लंबित हैं। जरूरत है निष्पक्ष त्वरित न्याय की। खैर! सुप्रीम कोर्ट में देश के विभिन्न संस्कृति और क्षेत्रों से जज आते है। आवश्यकता है ‘समायोजन’ की क्योंकि यह न्याय-मंदिर प्रतीक है करोड़ों भारतीयों के विश्वास, आत्मगौरव एवं सम्मान का। किसी भी व्यवस्था में भरोसेमंद संस्थाओं का होना उसके वजूद के लिए आवश्यक है। इस दृष्टि से न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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