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वैश्विक कारोबार का संतुलन बिगाड़ रही है अमेरिका की नीति

इसका सीधा असर अमेरिकी निर्यातकों पर पड़ेगा, क्योंकि निर्माण लागत बहुत अधिक बढ़ जाएगी।

जिम टेन्कर्सले | Last Modified - Mar 05, 2018, 03:25 AM IST

वैश्विक कारोबार का संतुलन बिगाड़ रही है अमेरिका की नीति

अमेरिकी उद्योग टैक्स दरों में कटौती चाहते थे, जिसका फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने लिया। इससे समझा जा रहा था कि उन्होंने अच्छा फैसला लिया है लेकिन, अब उन्होंने स्टील एवं एल्यूमीनियम के आयात पर बहुत ज्यादा टैरिफ बढ़ा दिया है। विश्लेषकों ने कहा कि इससे अन्य देशों के साथ ट्रेड वॉर छिड़ सकता है। वैश्विक कारोबार का संतुलन बिगड़ने लगेगा। इसका सीधा असर अमेरिकी निर्यातकों पर पड़ेगा, क्योंकि निर्माण लागत बहुत अधिक बढ़ जाएगी।


नेब्रास्का से रिपब्लिकन सीनेटर बेन सैसे ने इसे भयानक दुष्प्रभाव वाला फैसला बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति अपने फैसले पर पुनर्विचार करें। हालांकि, ट्रम्प के लिए कोई भी स्थिति असामान्य नहीं है। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि ‘ट्रेड वॉर अच्छी चीज़ होती है, इसमें जीतना कोई मुश्किल काम नहीं’। जबकि ट्रेड वॉर की स्थिति में कंपनियां नया निवेश व भर्तियां रोक लेती हैं। अगर दूसरे देशों ने अमेरिका को अलग-थलग कर कम टैरिफ वाली जगहों से फायदा लेना शुरू किया तो लाखों नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी।


ब्रैन्डिस यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्री पीटर ए. पेट्री कहते हैं, कारोबारी निवेश व्यापार की संभावनाओं पर निर्भर होता है। अगर ठंडे दिमाग से पुनर्विचार नहीं किया गया, तो अराजकता का वातावरण बन सकता है। यह ऐसा होगा जैसे किसी बास्केटबॉल के खेल से रैफरी को हटा दिया जाए। राष्ट्रपति ट्रम्प की योजना आयतित स्टील पर 25 फीसदी और एल्यूमीनियम पर 10 फीसदी टैक्स लगाने की है। वे चीन, रूस जैसे देशों से मुकाबला चाहते हैं, जो सस्ते उत्पाद बनाकर दुनियाभर में भेजते हैं। नया फैसला अमल में आते ही स्टील व एल्यूमीनियम से बनी चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी। ऑटोमोबाइल क्षेत्र, पेय निर्माता, फार्मा जैसे दर्जनों उद्योग प्रभावित होंगे।


अंतरराष्ट्रीय रेटिंग फर्म मूडी में अर्थशास्त्री मार्क ज़ेन्दी कहते हैं, अगर कभी आगे और कभी पीछे हटकर काम करना बंद हो गया तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। अन्य अर्थशास्त्री चेतावनी के तौर पर कह चुके हैं कि इस तरह ‘बदले की भावना’ वाले फैसले बढ़ते जाते हैं। इनके कारण टैरिफ बढ़ाने का जो चक्र घूमता है, उससे वैश्विक तरक्की की रफ्तार पर ब्रेक लग जाता है। अगर ऐसा फैसला कनाडा और मैक्सिको ने ले लिया, तो अमेरिकी कंपनियों के लिए हालात और बिगड़ जाएंगे।

टैरिफ बुरी बात नहीं

ओबामा प्रशासन में रह चुके अर्थशास्त्री जेर्ड बर्नस्टैन कहते हैं, चीन जैसे देशों को नियंत्रित करने के लिए कई बार टैरिफ लगाना अच्छा होता है। जरूरी नहीं कि ट्रेड वॉर हमेशा गलत हो। इकोनॉमिक पॉलिसी इन्स्टीट्यूट में अर्थशास्त्री थिआ एम. ली मानती हैं कि टैरिफ उन देशों के लिए सजा के समान होते हैं जो जरूरत से ज्यादा स्टील और एल्यूमीनियम उत्पादन करते हैं।

© The New York Times

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Web Title: vaishvik karobaar ka sntuln bigaaaड़ rhi hai amerika ki niti
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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