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रोगों का उपचार आसान हुआ है तो उसकी लागत भी घटे

आज़ादी के बाद जिस स्वास्थ्य ढांचे का निर्माण किया गया, वह अब और अधिक अपर्याप्त नज़र आने लगा है।

Dainik Bhaskar

Dec 23, 2017, 03:55 AM IST
article by devendra raj suthar over reduced costs of treating diseases

हाल ही में सामने आई विश्व बैंक और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ट्रैकिंग यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज नामक रिपोर्ट यह बताती है कि भारत समेत विश्व के अधिकांश देशों की एक बड़ी आबादी इसलिए कर्जदार होकर गरीबी रेखा के नीचे पहुंचती जा रही है, क्योंकि बीमारी की हालत में वह अपनी जेब से इलाज खर्च वहन करने को विवश होती है।


दुर्भाग्य से भारत की गिनती दुनिया के उन देशों में होती है, जहां सरकारी स्वास्थ्य ढांचा दयनीय दशा में है और निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य ढांचे का खर्च आम लोगों के बूते के बाहर है। इसी कारण संयुक्त राष्ट्र का मानव विकास सूचकांक यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भारत का स्थान कई अफ्रीकी देशों से भी पीछे है। इसमें कोई दो राय नहीं कि देश की आज़ादी के बाद जिस स्वास्थ्य ढांचे का निर्माण किया गया, वह अब और अधिक अपर्याप्त नज़र आने लगा है। बीते चार दशकों में मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की की है। नई तकनीक, अधिक प्रभावी दवाओं और आधुनिक उपकरणों के चलते चिकित्सक उन अनेक बीमारियों पर काबू पाने में समर्थ हैं, जो कुछ समय पहले तक लाइलाज मानी जाती थीं। इन बीमारियों का उपचार इसलिए आसान हुआ है, क्योंकि रोगों की सही पहचान के लिए तमाम अत्याधुनिक मशीनें इस्तेमाल होने लगी हैं। विडंबना यह है कि जैसे-जैसे बीमारियों के निदान में उपकरणों और प्रभावी दवाओं की भूमिका बढ़ रही है, वैसे-वैसे इलाज महंगा भी होता जा रहा है।


हर कोई अपना अथवा अपने परिजनों का बेहतर इलाज कराना चाहता है, लेकिन जहां सरकारी अस्पतालों की अव्यवस्था और उचित इलाज के अभाव की शिकायतें उन्हें हतोत्साहित करती हैं, वहीं निजी अस्पतालों का महंगा इलाज उन्हें डराता है। कई प्राइवेट अस्पतालों का इलाज तो इतना महंगा है कि वहां चंद दिनों का उपचार लोगों की कमर तोड़ देता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि इन अस्पतालों के डॉक्टर बेहतर इलाज के जरिये मरीज को बचा लेने की उम्मीद जगाते हैं। जरूरत सबके खर्च के दायरे में आने वाली मुकम्मल चिकित्सा सेवा की है।

देवेन्द्रराज सुथार,
जगनारायणव्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर
devendrasuthar196@gmail.com

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