--Advertisement--

कोई संकल्प है तो विकल्प ना सोचें

मेरा परिवार बहुत बड़ा है। तीन पीढ़ियों के कोई 19 लोग साथ रहते हैं।

Danik Bhaskar | Dec 04, 2017, 06:03 AM IST

मेरा परिवार बहुत बड़ा है। तीन पीढ़ियों के कोई 19 लोग साथ रहते हैं। जहां तक फ्लाइंग का सवाल है तो परिवार में तो ऐसी कोई प्रेरणा नहीं थी और ऐसी कोई घटना याद आती है कि जिससे फ्लाइंग को कॅरिअर बनाने का बीज मुझमें पड़ा हो। बस बचपन की यही याद है कि एक तमन्ना थी फ्लाइंग की। मेरे एक अंकल थे वे प्राय: मुझे छेड़ा करते थे कि यदि पायलट नहीं बना तो क्या करेगा। फिर मेरे एक मामाजी ने सीख दी कि यदि पायलट बनना है तो पायलट ही बनना है, दूसरा रास्ता सोचना भी नहीं चाहिए। तब मैंने भी संकल्प लिया कि मैं पायलट बनूंगा और पायलट ही बनूंगा, इसके सिवाय और कुछ नहीं बनूंगा।


मेरे चाचा की एक बेटी थी, जिसे मेरे पिताजी कहते थे कि तू डॉक्टर बनना। उसे बचपन से ही यह अहसास हो गया कि मुझे डॉक्टर बनना है। उसी तरह मुझे कहा गया कि तू पायलट बनना। फिर स्कूल, कॉलेज से होता हुआ। पायलट बन ही गया तो मन में हवाई जहाज बनाने का ख्याल आया। लोग पूछते हैं कि आप इंजीनियर नहीं हैं, सिर्फ पायलट हैं तो इतना एडवांस हवाई जहाज कैसे बना लिया? मेरा उनसे उलटा सवाल होता है कि ऐसे कितने विमान हैं, जिन्हें इंजीनियरों ने बनाया है। अामतौर पर पायलट ही विमान बनाते हैं और मैं पायलट हूं। हमें पायलट के रूप में सिखाया जाता है कि विमान किस तरह उड़ता है और यह तो ट्रेनिंग ही होती है कि हमें उसे किस तरह उड़ाना है। अब यह सही है कि बनाना तो सिखाते नहीं है। दुनिया में हर व्यक्ति में कोई कोई खूबी होती है। खुद वह व्यक्ति उस प्रतिभा को पहचान लेता है और उसे किस तरह इस्तेमाल में लाता है, यह महत्वपूर्ण है। मैंने अपने आब्जर्वेशन के स्किल को पहचान लिया। मेरे कई पायलट दोस्त हैं, इंजीनियर हैं पर उन्हें वे चीजें नहीं दिखती जो मुझे दिखती है। शायद इसी की वजह से मैं यह हवाई जहाज बना पाया।
मेरा हवाई जहाज रजिस्टर करने के लिए कई तरह के कारण दिए गए। एक यह दिया गया कि इन्होंने ग्लास कॉकपिट लगाया है। मैंने उनकी तकनीकी आपत्तियों के जवाब दिए। मैंने कहा कि शुरुआती मोबाइल में सिर्फ कॉलिंग होती थी। अब मोबाइल रहे हैं उसमें कैमरा है, केलक्यूलेटर है, टीवी है, रिकॉर्डिंग है। कई तरह की सुविधाएं हैं। इस तरह आप मुझे कह रहे हैं कि स्मार्ट फोन नहीं, पहले वाला फोन ही वापरें। अब जो कॉकपिट रहे हैं, वे ग्लास वाले हैं। उनमें वे पुरानी समस्याएं नहीं आतीं। फिर डीजीसीए को यकीन आया कि अमोल यादव जो कर रहे हैं वह सही है और उनके अफसर मिसगाइड कर रहे हैं।


एक सवाल पूछा जाता है कि मुझे विमान बनाने में छह साल लग गए। इसमें यह ध्यान रखना होगा कि यह विमान कोई फैक्ट्री में बना विमान नहीं है। जब आप व्यक्तिगत स्तर पर डेवलपमेंट करते हैं तो निवेश नहीं मिलता और वैसे भी इसमें दूसरों का पैसा लगाने का जोखिम नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि इसमें काफी एक्सपेरिमेंटल चीजें होती हैं। मेरी कोशिश थी कि मैं अपना ही पैसा इसमें लगाऊं। मुझे पैसे जमा कर करके आगे बढ़ना था। मेरी नौकरी, मेरा परिवार और दोस्त इन तीनों के अलावा पैसा जुटाने का कोई रास्ता नहीं था। हर चीज के लिए पैसे जमा करने पड़ते थे, फिर मटेरियल लेकर आता था और फिर उस पर काम करता था। लेकिन जो अनुभव मिला है उसका यह फायदा होगा कि जो 19 सीटर बनाने का हमारा प्लान है, उसे बनाने में चार से छह महीने से ज्यादा नहीं लगेंगे। सवाल सिर्फ पैसे का है। हमारे पास कैपेबिलिटी तो इतनी है कि हम कम से कम समय में बड़े से बड़ा विमान बना सकते हैं।
हमने अभी जो एडवान्स विमान बनाया है उसमें पांच करोड़ रुपए लगा, जो फैमिली बिज़नेस दोस्तों से जुटाया गया था। दुनिया में जो विमान उपलब्ध हैं और मेरे इस निर्माण में फर्क है तो यही कि यह भारत में व्यक्तिगत स्तर पर बनाया गया पहला विमान है। एयर वाइस मार्शल मुरली सुंदरम और मैं जेट एयरवेज में साथ थे। उनकी काफी रुचि थी। उन्होंने खुद ही काफी सलाह दी। दूसरे मेरे मददगार थे आशीष करमरकर। डिजाइन पर वर्क इंजीनियरिंग करवानी थी। हमें मास्टर आदमी चाहिए था। हमने रिसर्च किया तो पता चला कि आशीषजी इसके मास्टर आदमी है। हमने उनसे मिले तो पता चला कि हम एक ही गोरेगांवकर स्कूल में पढ़े हुए हैं। सारी बातें जानकर उनमें भी उत्सुकता पैदा हुई।


फर्स्ट एयरक्राफ्ट कंपनी की स्थापना ऐसी हुई कि विमान के लिए इंजन इम्पोर्ट करना था पर इसके लिए इंपोर्ट-एक्सपोर्ट लाइसेंस की जरूरत थी। यह लाइसेंस व्यक्ति को नहीं मिलता। यह सब मुझे नहीं मालूम था। फिर कंपनी की स्थापना हुई। कंपनी के नाम से लाइसेंस मिला और फिर सारी चीजें होती गई। लोग जुड़ते गए कारवा बढ़ता गया। 2014 में मुझे सबसे ज्यादा निराशा तब हुई जब डीजीसीए ने एक्सपेरिमेंटल विमान के रजिस्ट्रेशन के नियम ही खत्म कर दिए। यानी भारत में कोई विमान बनाकर उड़ा ही नहीं सकता था। खुशी का क्षण अभी आया नहीं है। सारी परमिशन आने लगेगी और प्रोजेक्ट चल पड़ेगा वह मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी होगी।
(जैसाउन्होंने मुंबई में विनोद यादव को बताया)

अमोल यादव

देश में निजी स्तर पर पहला विमान बनाने वाले पायलट