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बड़े बदलाव तो हो गए, अब असरदार अमल नए साल की चुनौती

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2018, 08:19 AM IST

​हर सालअपने साथ ऐसी घटनाएं लाता है जो हमारा भविष्य तय करती हैं। बीता साल खासतौर पर ऐसा रहा।

bhaskar editorial by diwakar jhurani

हर सालअपने साथ ऐसी घटनाएं लाता है जो हमारा भविष्य तय करती हैं। बीता साल खासतौर पर ऐसा रहा। इसने तीन से विशाल बदलाव दिए, जो सिर्फ इस साल बल्कि आने वाले कई बरसों तक प्रभाव डालते रहेंगे। ये नीतिगत बदलाव होते तो देश का भविष्य पूरी तरह भिन्न होता।
जीएसटी: इसनेदेश को एक बाजार में बदल देगा बल्कि कुछ राज्यों को जो गैर-वाजिब फायदा मिला था उसे भी खत्म कर देगा। इस कर दरें तो कम नहीं होंगी पर भ्रष्टाचार जरूर कम होगा, क्योंकि राज्यों की सीमा पर लगने वाला प्रवेश कर खत्म हो गया है। कुलमिलाकर दरों में जो कमी आई है उससे सामानों की मांग बढ़ेगी और लंबे समय में आर्थिक समृद्धि बढ़ेगी।


भारतकी कड़ी चीन नीति : डोकलाममें चीनी कदम के खिलाफ दृढ़ता दिखाने से कड़ा संदेश गया है। हमने उसके बेल्ट एंड रोड का भी बहिष्कार किया। अब दुनिया चीन से मुकाबले के लिए भारत-जापान-अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया का स्पष्ट गठजोड़ दिखेगा। अब भारत पाकिस्तान से टकराव में फंसा एशियाई देश भर नहीं बल्कि प्रमुख विश्व शक्ति है, जिसकी भूमिका चीन प्रभुत्व से निपटने के लिए जरूरी है। ऐसा कड़ा रवैया लेते तो चीन एशिया के सबसे शक्तिशाली देश के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर देश की अखंडता के लिए खतरा बन गया होता।


नीितगतऔजार के रूप में आधार : आधारका वजूद लंबे समय से हैं लेकिन बीते साल सरकार ने इसे सुशासन का जरिया बनाने का इरादा जताया। जरूरतमंदों के खाते में सब्सिडी पहुंचाना इसका स्पष्ट उद्देश्य है और इसके साथ जनधन खाते इसे अमल में लाने के सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हो गए। सरकारी सेवाओं की डिलिवरी के लिए आधार के इस्तेमाल को न्यायपालिका की अनुमति ने इसकी उपयोगिता बढ़ा दी है। इसकी अनुमति में सरकारी फंड का अब भी अक्षम इस्तेमाल और जमीनी स्तर पर व्यापक लीकेज होता रहता। अनिवार्य है कि नए साल में हम इनकी खामियां दूर कर प्रभावी क्रियान्वयन के जरिये इन बदलावों के असली परिणामों का फायदा उठाएं।

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bhaskar editorial by diwakar jhurani
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