--Advertisement--

डोकलाम विवाद का स्थायी हल खोजा जाना चाहिए

भारत चीन की ओआरओबी वाली परियोजना का हिस्सा नहीं है लेकिन, वह उसका विरोधी भी नहीं है।

Dainik Bhaskar

Mar 27, 2018, 12:35 AM IST
bhaskar editorial on doklam issue

डोकलाम में चीन की आक्रामकता फिर बढ़ रही है और इसी वजह से रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन को कहना पड़ा है कि भारत वहां किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। रक्षा मंत्री के इस बयान के हफ्ते भर पहले चीन में भारत के राजदूत गौतम बम्बावाले ने कहा था कि अगर चीन डोकलाम में यथास्थिति को बदलेगा तो पिछले साल वाली स्थिति खड़ी हो जाएगी। पिछले साल वहां चीन के सड़क निर्माण के विरोध में एक तरफ भारतीय सेना ने तो दूसरी तरफ चीनी सेना ने डेरा डाल दिया था।

दोनों सेनाओं और देशों के बीच उस स्थान के लिए 73 दिनों तक गतिरोध कायम रहा और फिर जब चीन की सेनाओं ने अपने कदम पीछे खींचे तो भारतीय सेना ने भी वापसी का निर्णय लिया। इस बीच उपग्रह से मिले चित्रों के अनुसार चीन ने विवादित स्थल के करीब सात हेलीपैड बनाए हैं। इस मसले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मौजूदा सरकार को आड़े हाथों लिया था और उसके बाद रक्षा मंत्री ने राज्यसभा में दिए बयान में यह स्वीकार किया था कि चीन ने वहां कुछ ढांचागत निर्माण किए हैं और संतरियों की चौकियों के साथ हेलीपैड भी बनाए हैं।

डोकलाम पर चीन के दोहरे रवैए के कारण भारत न सिर्फ अपनी सैन्य तैयारी कर रहा है बल्कि उससे राजनयिक वार्ताएं जारी रखे हुए है। चीन सारे मुद्‌दों पर एक साथ बातचीत का हिमायती रहा है, जबकि भारत धीरे-धीरे और एक-एक कर। हालांकि चीन में भारत के राजनयिक ने कहा है कि डोकलाम के मामले पर स्पष्ट और दोटूक बात होनी चाहिए।

संभवतः इसी प्रकार की वार्ता के लिए पिछले महीने विदेश सचिव विजय गोखले चीन गए थे और अगले महीने रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन भी चीन जा रही हैं। जबकि जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन(एससीओ) की बैठक के लिए चीन यात्रा पर रहेंगे। भारत-चीन के बीच चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का मामला भी उलझा हुआ है। भारत चीन की ओआरओबी वाली परियोजना का हिस्सा नहीं है लेकिन, वह उसका विरोधी भी नहीं है।

भारत को आपत्ति अगर है तो इस परियोजना के अहम भाग सीपीईसी से, क्योंकि वह पाकिस्तान के हिस्से वाले कश्मीर से गुजरता है। चीन की शक्ति और राजनय का मुकाबला करने के लिए भारत को भी इन दोनों उपायों का सहारा लेना ही होगा।

X
bhaskar editorial on doklam issue
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..