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न्यूनतम नियंत्रण के खिलाफ है उत्तर प्रदेश का नया कानून

पूर्व पुलिस अधिकारियों का तो कहना है कि पहले से मौजूद गैंगस्टर कानून राज्य के अपराधों को रोकने के लिए पर्याप्त था।

Danik Bhaskar | Dec 23, 2017, 04:17 AM IST
प्रचंड बहुमतसे उत्तर प्रदेश की सत्ता में आई भाजपा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध रोकने के प्रत्यक्ष इरादे से उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम 2017(यूपीकोका) पारित किया है किंतु, विपक्ष ने इसके पीछे राजनीतिक दुर्भावना की आशंका जाहिर की है। कुछ पूर्व पुलिस अधिकारियों का तो कहना है कि पहले से मौजूद गैंगस्टर कानून राज्य के अपराधों को रोकने के लिए पर्याप्त था। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सोच के विपरीत भाजपा यह मानकर चलती है कि उनके पहले की सरकारों ने संगठित अपराधों को बढ़ावा दिया है और उन्हें तभी रोका जा सकता है जब अपराधियों से सख्ती से पेश आया जाए तथा उसके लिए पर्याप्त कानूनी इंतजाम हो। हालांकि, सत्ता में आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि वे न्यूनतम नियंत्रण से अधिकतम प्रशासन चलाना चाहते हैं। यही लोकतंत्र का सिद्धांत भी है। इस सोच के विपरीत राजस्थान, छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश तक की भाजपा सरकारों को लगता है कि वे कठोर कानूनों के माध्यम से समाज को अपराध और भ्रष्टाचार मुक्त कर देंगी। जबकि विपक्ष का मानना है कि वे इसका प्रयोग अपने राजनीतिक विरोधियों और अल्पसंख्यकों को दबाने और लोकतंत्र मानवाधिकार का गला घोंटने के लिए करेंगी। यूपीकोका कानून भूमिगत गिरोहों, जबरन वसूली, मकानों पर जबरदस्ती कब्जा, जमीन पर कब्जा, वेश्यावृत्ति, अपहरण, फिरौती, धमकी और तस्करी करने वालों पर लागू होगा और ऐसे आरोपों में गिरफ्तार व्यक्ति को छह महीने तक जमानत नहीं मिलेगी। इसमें पांच साल से फांसी तक की सजा है। योगी आदित्यनाथ का दावा है कि वे कानून का दुरुपयोग नहीं होने देंगे और इसके उचित क्रियान्वयन के लिए गृह सचिव से लेकर कमिश्नर स्तर तक के अधिकारी निगरानी करेंगे। स्थिति उनके इस दावे के विपरीत है। आठ महीनों से शासन कर रही योगी सरकार पर हर 12 घंटे पर एक मुठभेड़ करने का आरोप है। मुख्यमंत्री कहते हैं कि वे अपराधियों की आरती नहीं उतारेंगे तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार को नोटिस जारी किया है। बाइस करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश के विकास का कोई मॉडल बने या बने वहां धर्म-जाति के नाम पर टकराव की आधारभूमि पहले तैयार होती रहती है। ऐसे में यूपीकोका या तो विपक्ष को कुचल देगा या उन्हें एकजुट कर देगा।