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राष्ट्रव्यापी हो सकता है चंद्रबाबू का अलगाव

आंध्र के विशेष दर्जे के बहाने यह 2019 की दिल्ली दौड़ है।

Dainik Bhaskar

Mar 09, 2018, 08:05 AM IST
bhaskar editorial on tdp bjp split

तेलुगु देशम पार्टी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार छोड़कर देश में एक नई किस्म की राजनीतिक बहस और ध्रुवीकरण की संभावना पैदा की है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने इसके पीछे का कारण राज्य को विशेष दर्जा न देना बताया है। उनका यह भी कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी उपेक्षा की है और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बयान से उन्हें आहत किया है।

अभी स्पष्ट नहीं है कि वे एनडीए भी छोड़ेंगे और सोनिया गांधी उन्हें अपने गठबंधन के लिए आमंत्रित करेंगी या नहीं। चंद्रबाबू के इस कदम से एक बात तो स्पष्ट है कि एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और देश में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के अलावा दूसरे भी मुद्‌दे सुलग रहे हैं, जो 2019 के चुनाव में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी और उनका गठबंधन जिन क्षेत्रीय दलों को साधकर दिल्ली की सत्ता में आया और जिनके बूते पर हाल में पूर्वोत्तर राज्यों में उसने सत्ता के समीकरण को उलट-पुलट दिया है वे क्षेत्रीय दल उसके लिए अगले चुनाव में परेशानी भी खड़ी कर सकते हैं।

क्षेत्रीय दलों से एकता का आह्वान करते हुए चंद्रबाबू नायडू ने कहा भी है कि उनके राज्य का विभाजन होने से जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई करने का वादा मोदी सरकार ने नहीं निभाया। वे जिस विशेष दर्जे की मांग कर रहे हैं उसे देने में सरकार यह कह कर पीछे हट रही है कि वह पूर्वोत्तर और तीन पहाड़ी राज्यों के अलावा अन्य को नहीं दिया जा सकता। हालांकि केंद्र आंध्र प्रदेश को उस स्तर का वित्तीय सहयोग देने को तैयार है। विशेष दर्जा मिलने पर राज्य में केंद्रीय योजनाओं का 90 प्रतिशत धन केंद्र से ही मिलेगा, जबकि अभी सिर्फ 60 प्रतिशत मिलता है। नायडू के इस पैंतरे में विशेष दर्जे के मसले को राष्ट्रीय स्तर तक उठाने की रणनीति भी दिखती है, क्योंकि इससे पहले उड़ीसा और बिहार यह मांग करते रहे हैं।

तेलुगु देशम ने यह मुद्‌दा आगामी चुनाव में राज्य की वाईएसआरसीपी, भाजपा और कांग्रेस से अपनी होड़ को देखते हुए भी उठाया है। वह राज्य के हितों के झंडाबरदार बनकर ताकत बढ़ाना चाहती है। भाजपा इस कदम को चुनौती और अवसर दोनों के रूप में भी देख रही है। जहां वह वाईएसआर से गठबंधन का प्रयास कर रही है वहीं अकेले दम पर चुनाव लड़ने का विकल्प भी खुला रखा है। आंध्र के विशेष दर्जे के बहाने यह 2019 की दिल्ली दौड़ है।

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