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आरिज की गिरफ्तारी से उजागर होंगे कई सुराग

आरिज भी मसूद अजहर के भाषण और फिलस्तीन के संघर्ष से प्रेरित था और उसी से उसके जीवन में भटकाव आया।

Danik Bhaskar | Feb 16, 2018, 05:24 AM IST

दिल्ली पुलिस ने बाटला हाउस मुठभेड़ कांड से संबंधित एक और आतंकी आरिज खान को नेपाल सीमा से गिरफ्तार करके बड़ी कामयाबी हासिल की है। इससे सिमी और इंडियन मुजाहिदीन के देशभर में फैले संपर्क सूत्रों की जानकारी तो मिलेगी ही यह भी पता चलेगा कि नेपाल में भारत विरोधी गतिविधियों की क्या स्थिति है।

आरिज खान बाटला हाउस में मारे गए आतिफ अमीन का सहयोगी था, लेकिन उस मुठभेड़ में बच निकला था। उसके बाद वह राजस्थान, महाराष्ट्र समेत जहां-जहां भी गया वहां निश्चित तौर पर आतंकी संगठनों के तार होंगे तभी उसे उन जगहों पर पनाह मिली। बल्कि आरिज की गिरफ्तारी की भूमिका भी तभी बनी जब हाल में सिमी सरगना अब्दुल सुभाष उर्फ तौकीर पकड़ा गया।

आरिज की आजमगढ़ से नेपाल तक की यह यात्रा एक ऐसे महत्वाकांक्षी युवक की कहानी है, जो सही सलाह और संगत के अभाव में देश और समाज के लिए खतरा बन गया। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दाखिला लेना चाहता था, फिर इंजीनियर बनना चाहता था और मुजफ्फरनगर के एक कॉलेज में दाखिला भी लिया।

इस बीच उसका संपर्क इंडियन मुजाहिदीन से हो गया और वह हिंसा की राह पर चला और बाद में नेपाल में भेष बदल कर स्कूल टीचर बनने पर मजबूर हुआ। यह कहानी किसी भी युवक के लिए एक नसीहत हो सकती है और सरकार के लिए एक चेतावनी। आरिज भी मसूद अजहर के भाषण और फिलस्तीन के संघर्ष से प्रेरित था और उसी से उसके जीवन में भटकाव आया।

भारत की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि वह देश के उन राज्यों की भी उपेक्षा न करे जो आतंकी गतिविधियों के नक्शे पर नहीं रहते और उन पड़ोसी देशों से भी लापरवाह न हो जिनकी छवि आतंक निर्यात करने की नहीं है। नेपाल में गरीबी और माओवाद के साथ उन गैर-कानूनी क्रियाकलापों की पूरी आशंका है जहां आतंक को पनाह मिलती है।

इससे पहले 1999 में जब भारतीय विमान को अपहरण करके कंधार ले जाया गया था तो आतंकी काठमांडू हवाई अड्‌डे से ही चढ़े थे। यह मौका है कि हमारी सुरक्षा एजेंसियां देश के भीतर उन सेल की तलाश करें जो आतंक के प्रति सहानुभूति रखती हैं, लेकिन सोई रहती हैं और सरकार का भी दायित्व है कि नेपाल को चौकस करे कि वहां भारत विरोधी तत्वों को पनाह न मिले।