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निजी सुरक्षा और मीडिया की आज़ादी में ही लोकहित

पत्रकार के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करके जो चुस्ती और प्रतिक्रिया दिखाई है उसने विवाद को जन्म दिया है।

Bhaskar Editorial | Last Modified - Jan 09, 2018, 08:36 AM IST

भारतीय विशिष्टपहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने व्यक्ति की निजता से संबंधित आंकड़ों के लीक होने संबंधी एक खबर पर पत्रकार के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करके जो चुस्ती और प्रतिक्रिया दिखाई है उसने विवाद को जन्म दिया है। पत्रकारों की प्रतिष्ठित संस्था एडिटर्स गिल्ड, भारतीय प्रेस क्लब और वीमेन प्रेस कोर ने उसे प्रेस की आजादी का दमन बताकर जो प्रतिक्रिया जताई है उस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्यान देना चाहिए। इस मामले पर यूआईडीएआई ने जो सफाई दी है कि उसमें एक प्रकार का अंतर्विरोध है। एक तरफ उसका कहना है कि आधार के बायोमेट्रिक डाटाबेस में किसी प्रकार की सेंध नहीं लगी है लेकिन, जब भी किसी प्रकार का अनाधिकृत प्रवेश किया जाता है तो कानून का उल्लंघन होता है और इसीलिए रपट दर्ज होती है। अपराध किसने किया है वह बाद में तय किया जाएगा। प्राधिकरण की इसी बात को आधार बनाकर एडिटर्स गिल्ड कह रहा है कि जब आंकड़े या लोगों के निजी विवरण चोरी हुए ही नहीं तो कानून का उल्लंघन हुआ कैसे? जनहित में खबरों को निकालने और व्यवस्था में सुधार की अपेक्षा के साथ उन्हें प्रकाशित या प्रसारित करना मीडिया के हर संस्थान की जिम्मेदारी है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस काम में मीडिया अपनी लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन भी करता है और अपनी तकनीकी क्षमता और संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल भयादोहन के लिए भी कर सकता है लेकिन, यह काम सरकार की ओर से भी होता है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में रजत प्रसाद बनाम सीबीआई के मामले में स्टिंग ॉपरेशन को सही ठहराते हुए यह भी कहा था कि पत्रकार अपना काम लोकहित में कर रहा है या निजी हित में इसका फैसला सबूतों के आधार पर होगा। इस फैसले की व्याख्या में सरकार की कार्रवाई के औचित्य और मीडिया की आज़ादी का दारोमदार है। मौजूदा स्थिति में आधार कार्ड की उपयोगिता, मीडिया की आज़ादी और व्यक्ति की निजता के अधिकार के सवाल उलझते जा रहे हैं। अगर सरकार, मीडिया और नागरिक सभी लोकहित के लिए काम कर रहे हैं तो इस मामले में किसी तरह का भ्रम और टकराव होना नहीं चाहिए। उम्मीद है कि आधार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस विषय के सीमित और व्यापक पहलुओं से कोहरा छंटेगा।
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Web Title: niji surksaa aur midiyaa ki aaज़aadi mein hi lokhit
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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