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उपचुनाव से निकला विपक्ष के लिए एकता का संदेश

देश के सबसे बड़े राज्य की दो अहम सीटों पर हार होना प्रदेश के शासन पर बड़ी टिप्पणी है।

Danik Bhaskar | Mar 15, 2018, 03:58 AM IST

पूर्वोत्तर राज्यों के चुनाव परिणामों ने भाजपा को जश्न मनाने के जो अवसर दिए थे वेे उत्तर प्रदेश और बिहार के तीन लोकसभा उपचुनावों ने छीन लिए हैं। इन परिणामों को सीधे 2019 से जोड़ देना जल्दबाजी होगी लेकिन, इसने बिखर रहे विपक्ष को एकता की नई रोशनी जरूर दी है। बिहार की अररिया लोकसभा और जहानाबाद विधानसभा सीट पहले से राष्ट्रीय जनता दल की रही है इसलिए यहां पर राजद की जीत से लालू की मजबूती और तेजस्वी की लोकप्रियता से बड़ा कोई संदेश नहीं निकलता।

बड़ा संदेश निकल रहा है उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव से जहां 2014 के चुनाव में राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जीते थे और उनके इस्तीफे से यह सीटें खाली हुई थीं। ऐसे समय में जब भाजपा के दिग्विजय का डंका चारों ओर बज रहा है तब देश के सबसे बड़े राज्य की दो अहम सीटों पर हार होना प्रदेश के शासन पर बड़ी टिप्पणी है।

यह टिप्पणी उस अव्यवस्था पर है जो कुछ महीने पहले गोरखपुर के अस्पतालों में एनसेफेलाइटिस से बच्चों के मरने पर दिखी थी और सरकार के मंत्रियों के संवेदनहीन बयानों में प्रकट हुई थी। यह अभिव्यक्ति है किसानों और युवाओं की उस नाराजगी की जो कृषि की उपज के उचित दाम और नौकरियां न मिलने से पैदा हुई है। यह उत्तर प्रदेश भाजपा में चल रही खींचतान का परिणाम भी हो सकता है। उससे कहीं ज्यादा यह समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच बने तात्कालिक गठबंधन का असर है।

स्पष्ट है कि सामाजिक न्याय की इन दोनों पार्टियों को महसूस हो गया है कि अगर वे राम लहर को रोकने वाले 1993 के मुलायम-कांशीराम गठबंधन को याद करेंगी तो भाजपा का मुकाबला कर सकती हैं और अगर वे 1995 के राज्य अतिथि गृह कांड को याद रखेंगी तो अस्तित्व भी गंवा सकती हैं। हालांकि मायावती ने इस गठबंधन को सिर्फ इन्हीं चुनावों तक बताया था लेकिन, इन चुनावों के अच्छे नतीजों से वे सबक ले सकती हैं और देश में विपक्षी एकता के प्रयासों को अमली जामा पहना सकती हैं।

दूसरी ओर बिहार में अररिया और जहानाबाद की सीट कायम रखते हुए राजद ने आत्मविश्वास हासिल किया है और यह दिखाया है कि अगर लालू प्रसाद लंबे समय जेल में रहते हैं तो उनका मतदाता और आक्रामक व एकजुट होगा जो राजग के लिए भारी पड़ेगा।