Hindi News »Abhivyakti »Editorial» Bhaskar Editorial Over India Emerges As World S Largest Importer Of Arms

हथियारों के आयात में अव्वल रहना भी चिंता का कारण

जाहिर सी बात है कि जिस देश के चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी हों वह निश्चिंत होकर नहीं बैठ सकता।

Bhaskar | Last Modified - Mar 14, 2018, 01:28 AM IST

दुनिया के हथियारों का सर्वाधिक 12 प्रतिशत हिस्सा आयात करके भारत का पहले स्थान पर आना आश्वस्त भी करता है और चिंता भी बढ़ाता है। आश्वस्त इसलिए करता है, क्योंकि भारतीय सेना के पास आधुनिक हथियारों और गोला बारूद की कमी की शिकायत उस समय जोरदार तरीके से की गई थी, जब मौजूदा रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन ने कार्यभार संभाला था। तब सरकार पर दबाव था कि वह रक्षा सौदों की पारदर्शिता के लिए देश की सुरक्षा के साथ समझौता न करे। इसलिए अगर भारत ने अपनी सुरक्षा आवश्यकता पूरी करने के लिए 2013 से 2017 के बीच वैश्विक शस्त्र आयात में 12 प्रतिशत भागीदारी की है और पिछले दस सालों में इस मोर्चे पर 24 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की है तो इससे यह साबित होता है कि एक राष्ट्र के रूप में हम कितने चौकस हैं। हालांकि, इससे यह भी साबित होता है कि हमारा पड़ोस हमें असुरक्षित करता है और तनाव देने के साथ हथियारों की होड़ पर मजबूर करता है।

जाहिर सी बात है कि जिस देश के चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी हों वह निश्चिंत होकर नहीं बैठ सकता। विडंबना यह है कि इस दौरान चीन और पाकिस्तान के हथियार आयात में क्रमशः 19 प्रतिशत और 36 प्रतिशत गिरावट आई है। चीन तो अपने हथियार स्वयं बना रहा है और वह पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार को निर्यात भी कर रहा है जबकि मेक इन इंडिया के तमाम दावों के बावजूद भारत अभी भी हथियारों का उत्पादन शुरू नहीं कर पाया है।

स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की तरफ से जारी आंकड़े उन आलोचकों का भी मुंह बंद करते हैं जो रूस से बढ़ती दूरी और अमेरिका से नज़दीकी को मुद्‌दा बनाते हैं। आज भी भारत का 62 प्रतिशत शस्त्र आयात रूस से ही होता है भले ही पिछले पांच वर्षों में अमेरिका से हथियारों का आयात बढ़कर 15 प्रतिशत तक आया है।

आंकड़े दर्शाते हैं कि किस तरह एशिया और अफ्रीका के देश हथियार खरीद रहे हैं और अमेरिका और यूरोप के देश उन्हें बनाने-बेचने में लगे हैं। वे अपनी शांति और समृद्धि के लिए इधर अशांति निर्यात कर रहे हैं। अब चीन भी वही भूमिका अख्तियार कर रहा है। प्रधानमंत्री ने शपथ लेने के बाद केरल की एक रैली में भारत-पाक में हथियारों की होड़ कम करने और गरीबी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर धन व्यय का आह्वान किया था। विडंबना है कि उस आह्वान को कोई सुनने वाला नहीं है।

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