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नॉलेज इकोनॉमी से ही आय में समानता लाई जा सकती है

भारत के लिए भी नालेज इकोनॉमी बनने के लिए सुनहरा अवसर है, बस आवश्यकता है तो नॉलेज इकोसिस्टम उपलब्ध करवाने की।

मनमोहन शर्मा| Last Modified - Mar 15, 2018, 04:21 AM IST

bhaskar under 30 y column on 15th march
नॉलेज इकोनॉमी से ही आय में समानता लाई जा सकती है

ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के अंतर्गत भौतिक वस्तुओं और प्राकृतिक संपदा का उपयोग करने के स्थान पर बौद्धिक संपदा का उपयोग कर आर्थिक संपत्ति निर्मित की जाती है। भारत क्रयशक्ति क्षमता की दृष्टि से विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन जीडीपी  के आकार की दृष्टि से अभी भी यह विश्व में आठवें स्थान पर है, जबकि भारत में सेवा क्षेत्र जीडीपी का लगभग 58 फीसदी है। टेक्नोलॉजी के इस युग में पूंजी व श्रम को एक निश्चित सीमा तक बढ़ाया जा सकता है लेकिन, ज्ञान ऐसा विषय है जिसे कितना भी बढ़ाया जा सकता है, बशर्ते इसके लिए नॉलेज इकोसिस्टम उपलब्ध हो। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने नॉलेज इकोनॉमी के लिए इकोसिस्टम बनाया और आज एपल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, फेसबुक जैसी विशाल कंपनियां वहां हैं।


भारत के पास भी अपने आपको नॉलेज इकोनॉमी बनाने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। एक तो भारत के पास 65 फीसदी युवा व सृजनशील आबादी है। दूसरा, भारत सूचना व संचार टेक्नोलॉजी में तेजी से उभर रहा है। तीसरा, भारत में विश्व का सबसे बड़ा फिल्म उद्योग है तथा एक बड़ा टीवी बाजार भी  है जो दृश्य-श्रव्य सेवाओं में भारत को लाभप्रद स्थिति देता है।  विश्व बैंक के इकोनॉमी इंडेक्स के अनुसार 145 देशों में से भारत का 109 वां स्थान है, जो चिंताजनक है। अमेरिका की जीडीपी का 33 प्रतिशत नॉलेज आधारित है, चीन की जीडीपी का 10 फीसदी है तो भारत की जीडीपी का केवल दो फीसदी  ही नॉलेज आधारित स्रोतों से आता है। 


भारत के लिए भी नालेज इकोनॉमी बनने के लिए सुनहरा अवसर है, बस आवश्यकता है तो नॉलेज इकोसिस्टम उपलब्ध करवाने की। सरकार को इसके लिए कानून और विधान प्रक्रिया को सरल बनाना होगा। ढांचागत सुधार करने होंगे। व्यापार व निवेश संबंधी बाधाएंं समाप्त करनी होंगी। श्रम बल को कुशल बनाना होगा। छोटे व्यापारियों व नए स्टार्टअप्स को वित्तीय सुविधाएं देनी होंगी। नॉलेज इकोनॉमी का रास्ता अख्तियार करके भारत विकसित देश बन सकता हैं और इसी से मिडिल इनकम ट्रैप से बचकर आय में समानता भी लाई जा सकती हैं।

 

मनमोहन शर्मा, 24
दिल्ली विश्वविद्यालय,नई दिल्ली
mannuvyas888@gmail. com

 

 

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