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क्या तीसरा मोर्चा राजधानी तक सफर कर पाएगा?

भाजपा के विजय रथ यात्रा के लिए इसलिए भी झटका हो सकता है, क्योंकि दक्षिण भारत की लोकसभा सीटों पर क्षेत्रीय दलों का आज भी

Danik Bhaskar | Mar 09, 2018, 08:08 AM IST

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चन्द्रशेखर राव ने भाजपा और कांग्रेस से अलग गुणात्मक राजनीति करने के लिए सभी दलों से साथ आने का आह्वान किया है। उनकी इस पुकार को ममता बनर्जी ने भी सुन ही लिया और भरोसा दिलाया है कि वे ऐसे प्रयोग में उनके साथ हैं। यह बात भाजपा के विजय रथ यात्रा के लिए इसलिए भी झटका हो सकता है, क्योंकि दक्षिण भारत की लोकसभा सीटों पर क्षेत्रीय दलों का आज भी अच्छा-खासा प्रभाव है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल के साथ अगर बंगाल और बिहार जैसे राज्यों को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा भाजपा की नींद उड़ा देने वाला है।


ऐसे में तीसरे मोर्चे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। शिवसेना के एनडीए से अलग होने के बाद चन्द्रशेखर राव का हाल ही का बयान भाजपा के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है। उत्तर-पूर्व के राज्यों के चुनावी परिणाम का असर विपक्ष को सोचने पर ही मजबूर नहीं कर रहा है बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में धुर विरोधी क्षेत्रीय दलों को भी साथ आने को प्रेरित कर रहा है। मोदी की लोकप्रियता की वजह यह भी है कि उनके सामने मजबूत विपक्षी उम्मीदवार नहीं है। चार साल के कार्यकाल पर गुस्सा निकालते हुए राव यह भी कह गए कि अब बार-बार गुस्सा होकर कभी भाजपा कभी कांग्रेस को चुनने की बजाय गुणात्मक राजनीति पर ध्यान देना होगा। ये बयान अपने आप में काफी मायने रखता है।


इस असंतोष का एक कारण यह भी है कि एनडीए के साझीदार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में खुद को बौना पाते हुए गठबंधन में असहज महसूस कर रहे हैं। उनकी यही असहजता सबको साथ आकर भाजपा के खिलाफ जाने के लिए मजबूर कर रही है। अमित शाह का संगठन यह भी जानता है कि अगर 2019 में 230 सीट से ऊपर नहीं जा पाए तो दिल्ली की सत्ता पर काबिज रहना मुश्किल होगा। ऐसे में अगर क्षेत्रीय दल कुछ अच्छा प्रदर्शन करते हैं ओर कांग्रेस अपनी सीट में इजाफा कर पाती है तो 2019 का सफर भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। देखने की बात है कि विपक्ष कितना एकजुट हो पाता है।

गौरव द्विवेदी, 21
राजनीति व अंतरराष्ट्रीय संबंध,
केंद्रीय गुजरात विवि, गांधीनगर
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