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मानवता के नाम पर कटुता बढ़ाने का राजनयन

पूरा भारत पाकिस्तान के इस व्यवहार के विरुद्ध निंदा और हमले का तेवर अपनाए हुए है।

Dainik Bhaskar

Dec 28, 2017, 07:52 AM IST
Bitterness in the name of humanity

कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी के साथ किए गए पाकिस्तान के अपमानजनक व्यवहार से यही लगता है कि हमारा यह पड़ोसी इंसानियत के नाम पर जलालत और मोहब्बत के नाम पर नफरत भरा व्यवहार करने की राजनयिक परम्परा का हिमायती है। यही वजह है कि पाकिस्तान के खिलाफ जासूसी के आरोप में मौत की सजा पाए पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव से उनकी मां और पत्नी की मुलाकात के बाद दोनों देशों में कटुता कम होने की बजाय बढ़ गई है। पत्नी के मंगलसूत्र, बिंदी और जूते उतरवाना और उन्हें कांच की परदेदारी में बातचीत की इजाज़त देना उस सहमति का उल्लंघन था दोनों देशों के बीच हुई थी।

ऊपर से जाधव की पत्नी चेतना के जूते न वापस करके पाकिस्तान ने राजनयिक विवाद खड़ा करने का बहाना सुरक्षित कर लिया है। इसीलिए पूरा भारत पाकिस्तान के इस व्यवहार के विरुद्ध निंदा और हमले का तेवर अपनाए हुए है। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने तो पाकिस्तान पर हमला करने और उसके चार टुकड़े करने की सलाह दे डाली है। संसद में सभी पार्टियों ने एक स्वर से पाकिस्तान को कोसा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान ने सिर्फ इतना कह कर चुप्पी साध ली है कि उसकी गाली-गलौज में दिलचस्पी नहीं है। साफ है कि जाधव की रिहाई या उनकी सजा को कम करने के मामले पर कोई बात बनती दिख नहीं रही है।

पाकिस्तानी सरकार ने कहा है कि अभी कुलभूषण के परिवार से और मुलाकातें होनी हैं लेकिन, वह इन मुलाकातों में जाधव को एक आतंकी साबित करने का प्रयास ही कर रहा है। यह मुलाकात सरकारी प्रयासों से ज्यादा उस गैर-सरकारी (ट्रैक टू) राजनय का परिणाम है जो पहले भी होता रहा है और अब भी चल रहा है। इसके बावजूद सेना के इशारे पर चलने वाली पाकिस्तानी विदेश नीति और भारत में सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर बढ़ती कट्‌टरता ऐसे प्रयासों को सीमित अहमियत देने के साथ ध्वस्त करने का ही इरादा रखती है। निश्चित तौर पर भारतीय राज्यव्यवस्था और उसकी राजनीति लोकतांत्रिक ताकतों के हाथ में है और पाकिस्तान से बेहतर है लेकिन अपनी उदारता के बदले में साजिशों के जख्म खाने के बाद भारत भी पाकिस्तानी राह पर ही जा रहा है। ऐसे में वार्ता और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की दखल की बजाय दबाव और बदले की कार्रवाई ही प्रमुख राजनयिक हथियार बचे हैं।

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