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उद्योगों को चौथी औद्योगिक क्रांति अपनाने योग्य बनाएं

निजी क्षेत्र में रिसर्च व इनोवेशन के लिए विशेष फंड चाहिए

Dainik Bhaskar

Jan 30, 2018, 06:27 AM IST
चंद्रजीत बनर्जी डायरेक्टर जनरल, कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री चंद्रजीत बनर्जी डायरेक्टर जनरल, कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री

भारत जैसी विशाल और विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था के तेजी से बढ़ने के साथ आर्थिक वृद्धि को गरीबी उन्मूलन और जॉब निर्मित करने की सही दिशा में रखने की अपरिहार्य चुनौती भी आती है। सरकार के लिए यह संतोषजनक है कि पिछले कुछ वर्षों में जो संरचनात्मक सुधार लागू किए गए हैं, उन्होंने अधिकतर मेक्रोइकोनॉमिक संकेतकों को स्थिरता प्रदान की है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसा प्रमुख सुधार काफी सुगमता से आगे बढ़ा है और अब पूर्वानुमानों के मुताबिक 6.5 फीसदी की जीडीपी वृद्धि दर अपेक्षित है। हालांकि, मध्यम किस्म के निवेश, धीमी उपभोक्ता मांग और कृषि क्षेत्र में ठोस पहल करने की आवश्यकता है। इसके साथ आम लोगों के लिए रोजगार पैदा करने, शिक्षा व स्वास्थ्य रक्षा के क्षेत्रों में भी तत्काल कदम उठाने की जररूत है।


वित्तमंत्री को अधिक पूंजी और सामाजिक क्षेत्र में खर्च के लिए फंड्स खोजने होंगे। रक्षा, रेलवे और अन्य सरकारी एजेंसियों के पास मौजूद हाई लैंड असेट यानी अचल संपत्ति के व्यावसायिक उपयोग पर भी विचार किया जा सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण करने और वंचित तबकों के खातों में सीधे लाभ पहुंचाकर खर्च के बेहतर प्रबंधन के अन्य विकल्प हैं। वित्तीय घाटे के मामले में काफी प्रगति हुई है। इसे वाजिब स्तर पर इसी तरह बनाए रखना होगा ताकि निवेशकों में भरोसा पैदा किया जा सके।


कृषि की उत्पादकता बढ़ाने और खेती को उद्योगों से जोड़ने से किसानों की आय बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार भी निर्मित किया जा सकेगा। इसके लिए सिंचाई का विस्तार कर हर किसान के लिए पर्याप्त पानी सुनिश्चित करना जरूरी है। इनपुट्स के लिए अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी, यांत्रीकरण और बेहतर कीमतों से भी किसानों का जोखिम कम होगा। सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउस और ट्रांसपोर्ट की मजबूत शृंखला का लक्ष्य रखा गया है, इसके लिए अधिक फंड्स की जरूरत होगी। फूड प्रोसेसिंग को फास्ट ट्रैक पर लाना होगा ताकि खाद्यों की बर्बादी घटाकर उत्पाद में वैल्यू जोड़ी जा सके। इससे किसानों को बेहतर आमदनी देने में मदद मिलेगी। बुनियादी ढांचे का निर्माण प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि इससे मांग बढ़ती है और आजीविका के नए अवसर भी बनते हैं। नीलामी के लिए विशाल प्रोजेक्ट्स की पहचान करके पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को प्रभावी ढंग से पुनर्जीवित करने की जरूरत है। कहना न होगा कि इसके लिए सारी गारंटियां और विवाद निराकरण की तीव्र प्रक्रिया पक्की करनी होगी। सरकार को ग्रामीण सड़कों व हाईवे, रेलवे, शहरी ढांचे आदि बातों पर मजबूत फोकस बनाए रखना चाहिए। ठोस वृद्धि में इसकी महत्वूपूर्ण भूमिका होगी।


वित्तमंत्री ने पिछले साल ज्यादातर कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स की दर गिराकर 25 फीसदी की थी। उम्मीद है इस बजट में यह दर सभी पर लागू होगी। यह प्रमुख देशों में कम टैक्स दरों के अनुरूप ही होगा। भारतीय उद्योग को उभरती चौथी औद्योगिक क्रांति को अपनाने योग्य बनाने की महत्वपूर्ण चुनौती सामने है। निजी क्षेत्र में शोध व विकास और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए विशेष फंड समय की मांग है।


अधिक और बेहतर जॉब पैदा करने के लिए वित्तमंत्री ने पहले नए कर्मचारियों के लिए कुछ इंसेन्टिव उपलब्ध कराए थे। सामाजिक सुरक्षा उपाय और वर्कफोर्स संबंधी फैसलों में रोजगार प्रदाताओं के लिए लचीलापन अधिक जॉब पैदा करने की दिशा में प्रोत्साहन के लिए जरूरी है। एक विकल्प टैक्सटाइल, गारमेंट और फुटवेयर की तरह तय अवधि के रोजगार के विकल्प को अधिक सेक्टरों में बहाल करने का भी है। नीति आयोग ने जॉब पैदा करने के लिए तटवर्ती आर्थिक क्षेत्र के लिए रणनीति की पहचान की है। इसे गति देना समय के मुताबिक होगा।


सामाजिक क्षेत्र में सरकारी खर्च को बढ़ाकर नए स्तर पर ले जाना अनिवार्य है। जीडीपी का 6 फीसदी शिक्षा और ढाई फीसदी स्वास्थ्य रक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य है। बजट लक्ष्य की दिशा में बढ़ने की शुरुआत हो सकता है। नई टेक्नोलॉजी ने डिलिवरी मॉडल को आमूल बदल दिया है, इसका फायदा लेना होगा। शिक्षा में शिक्षकों की संख्या और गुणवत्ता को विस्तार देना अहम है, जबकि स्कूलों के लिए टेक्नोलॉजी फंड से हमारे बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने में योगदान दे सकता है। सभी लोगों को स्वास्थ्यरक्षा का लाभ मिले इस पर काफी फोकस रहने की उम्मीद है। जिलों में तृतीयक स्तर पर अस्पतालों में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी से मदद मिलेगी। वित्तमंत्री के सामने कड़ी चुनौती है पर मुझे भरोसा है कि वे इस साल दूरगामी बजट देंगे।

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चंद्रजीत बनर्जी डायरेक्टर जनरल, कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीचंद्रजीत बनर्जी डायरेक्टर जनरल, कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री
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