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संस्कृति के लिए राजनीति से टकराव मोल ले रहे हैं सीईओ

‘सीईओ एक्टिविज़्म’ से समाज को जोड़ रहे हैं कॉर्पोरेट हाउस

Danik Bhaskar | Mar 05, 2018, 03:18 AM IST

अमेरिका के पार्कलैंड में गोलीबारी की घटना में 17 लोगों की मृत्यु के बाद वहां बंदूकों की बिक्री पर बहस जारी है। बड़ी संख्या में विश्वविद्यालयों के छात्रों ने आंदोलन छेड़ रखा है। वे समाज में सुरक्षित वातावरण चाहते हैं। इसी दिशा में बड़ी कंपनियों के सीईओ भी आगे आ गए हैं। वे ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिनमें समाज का हित जुड़ा हो। उन्हें वहां ‘कल्चर वॉरियर’ कहा जाने लगा है।


डेल्टा एयरलाइन, हर्ट्ज इलेक्ट्रॉनिक्स और एंटी वायरस फर्म सिमेन्टेक के सीईओ ने कहा कि वे नेशनल राइफल एसोसिशन (एनआरए) के सदस्यों को अब कोई फायदा नहीं देंगे। इसी तरह डिक स्पोर्टिंग गुड्स के सीईओ एडवर्ड स्टैक ने कहा कि वह बंदूक बिक्री के लिए उम्र सीमा बढ़ाने का समर्थन करते हैं। साथ ही उनकी कंपनी एआर-15 रायफल की बिक्री कभी नहीं करेगी। स्टैक ने कहा- हम लोगों को बताना चाहते हैं कि हम उनके साथ हैं। इस घोषणा के कुछ ही घंटे बाद वालमार्ट के सीईओ ने घोषणा कर दी कि वे भी बंदूक बिक्री में उम्र सीमा बढ़ाने का समर्थन करते हैं।


चीफ एग्ज़ीक्यूटिव द्वारा ऐसे फैसले लेने का यह नया उदाहरण है, इसे ‘सीईओ एक्टिविज़्म’ कहना उचित है क्योंकि बड़े कॉर्पोरेशन और उनके चीफ एग्ज़ीक्यूटिव देश की संस्कृति को बचाने के लिए अनोखे युद्ध में लोगों के पक्ष में खड़े हो रहे हैं। हालांकि, जो कंपनियां पहले इस तरह के फैसले कर चुकी हैं, उनकी लोकप्रियता और बिक्री बढ़ी है। हालांकि, कुछ कंपनियों को अपने फैसलों के कारण लोगों के विरोध का सामना भी करना पड़ता है। कुछ समय पहले नेशनल फुटबॉल लीग में राष्ट्रगान के मसले पर पापा जॉन्स के चीफ एग्ज़ीक्यूटिव ने गलत बयान दे दिया था। उसके बाद कंपनी की बिक्री में तेजी से गिरावट आई और अंतत: चीफ एग्ज़ीक्यूटिव को इस्तीफा देना पड़ा था।


इस बदलाव की और खबरें आने में वक्त लगेगा, क्योंकि सीईओ एक्टिविज़्म ने ऐतिहासिक बदलाव की राह चुनी है। पहली बार कॉर्पोरेशन क्षेत्र को राष्ट्रीय राजनीति से टकराव लेते देखा जा रहा है। यह अलग बात है कि आज के जहरीले राजनीतिक वातावरण में कॉर्पोरेट रणनीति को नए तरह से निर्देशित किया जाए। परंतु राजनीति के नए वातावरण में आने के लिए दूसरी बड़ी कंपनियां फिलहाल तैयार नहीं है। पेप्सी और स्टारबक्स को पिछले दिनों ‘फेक न्यूज़’ के झटके लगे हैं, लेकिन आने वाले समय में कई बड़े नाम सीईओ एक्टिविज़्म में सुनाई देंगे।

© The New York Times