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अस्पतालों की लूट से बचाने के लिए नया सिस्टम बनाएं

इस वक्त सारे पेशे ही बाजार की ताकतों के शिकार हो गए हैं तो मेडिकल क्षेत्र अपवाद नहीं है।

Danik Bhaskar | Dec 09, 2017, 06:51 AM IST

हाल ही में दिल्ली में एक निजी अस्पताल में एक नवजात को मृत घोषित कर दिया, जो दरअसल जीवित था पर बाद में सारे प्रयासों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। स्वास्थ्य रक्षा का क्षेत्र सामाजिक स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन, आज जर्जर स्थिति में है। यह क्षेत्र निस्वार्थ सेवा की भावना और मानवीयता के बोध पर निर्भर है। इसके लिए नैतिकता का अंतर्निहित अहसास भी होना चाहिए, जो हर डॉक्टर द्वारा ली जाने वाली ‘हिपोक्रेटिक शपथ’ में झलकता है। जब इस वक्त सारे पेशे ही बाजार की ताकतों के शिकार हो गए हैं तो मेडिकल क्षेत्र अपवाद नहीं है।
मेडिकल कॉलेज की मान्यता में रिश्वत, सीट हासिल करने और बाद में जॉब पक्का करने के लिए दिया जाने वाला करोड़ों का चंदा आदि का मेडिकल शिक्षा पर विपरीत असर हो रहा है। इससे पैसा कमाने की अंधाधुंध प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी को अस्पतालों की इस ‘लूट’ से बचाने के लिए नया कानूनी ढांचा बनाने का प्रस्ताव रखा है। पांच साल पहले अधिसूचित चिकित्सा संस्थान अधिनियम को दिल्ली सहित कई राज्यों में अब तक लागू नहीं किया गया है, जो उसी खराब दशा का द्योतक है। फिर पांच अस्पतालों पर 600 करोड़ का जुर्माना ठोका गया है पर अब तक वसूली नहीं हो पाई है। दरअसल, अस्पतालों को इस वादे के आधार पर रियायती दरों पर जमीन दी जाती है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के रोगियों को इलाज देंगे, जो नर्सिंग सेल्स एक्ट के हिसाब से कुल रोगियों का दस फीसदी होना चाहिए। इसके उल्लंघन पर ही उक्त जुर्माना ठोका गया है।
फिर हमारी स्वास्थ्य रक्षा सेवाएं शहर केंद्रित हैं। जैसे ग्रामीण भारत में शिशु मृत्यु दर गंभीर मुद्‌दा है। गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से शिशुओं की मौत हाल की घटना है। कुछ अस्पतालों व डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई से परे जाकर हमें सकारात्मक सुधारों की जरूरत समझनी होगी। एक ऐसे व्यापक सिस्टम की जरूरत है, जिसमें स्वास्थ्य रक्षा जनकल्याण और सार्वजिक नीति का महत्वपूर्ण एजेंडा हो।

श्रुति गुप्ता,18
कमला नेहरू कॉलेज,
दिल्ली यूनिवर्सिटी
guptashruti410@gmail.com