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युवाओं को बेरोजगारों की भीड़ नहीं, कुशल संसाधन में बदलें

महत्वपूर्ण यह है कि कोई भी राष्ट्र अपनी युवा पूंजी का भविष्य के लिए निवेश किस रूप में करता है।

devendraraj suthar | Last Modified - Jan 13, 2018, 03:34 AM IST

  • युवाओं को बेरोजगारों की भीड़ नहीं, कुशल संसाधन में बदलें
    देवेन्द्रराज सुथार, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर, राजस्थान

    आज भारत की युवा ऊर्जा चरम पर है और भारत विश्व में सर्वाधिक युवा जनसंख्या वाला देश माना जा रहा है। इसी युवा शक्ति में भारत की ऊर्जा अंतर्निहित है। इसीलिए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने इंडिया 2020 नाम अपनी कृति में भारत के महान राष्ट्र बनने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रेखांकित की है। पर महत्वपूर्ण यह है कि कोई भी राष्ट्र अपनी युवा पूंजी का भविष्य के लिए निवेश किस रूप में करता है।


    हमारा राष्ट्रीय नेतृत्व देश के युवा बेरोजगारों की भीड़ को बोझ मानकर उसे भारत की कमजोरी बताता है या उसे कुशल मानव संसाधन के रूप में विकसित करके एक स्वाभिमानी, सुखी, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनाता हैं, यह हमारे राजनीतिक नेतृत्व की राष्ट्रीय व सामाजिक सरोकारों की समझ पर निर्भर करता है। साथ ही, युवा पीढ़ी अपने सपनों को किस तरह सकारात्मक रूप में ढालती है, यह भी बेहद महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में लगभग 60 करोड़ लोग 25 से 30 वर्ष के हैं जबकि देश की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या की आयु 35 वर्ष से कम है। यह स्थिति वर्ष 2045 तक बनी रहेगी। अपनी बड़ी युवा आबादी के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था नई ऊंचाई पर जा सकती है। लेकिन इस ओर भी ध्यान देना होगा कि आज देश की आबादी का बड़ा हिस्सा बेरोजगारी से जूझ रहा है।


    श्रम ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार देश की बेरोजगारी दर 2015-16 में पांच प्रतिशत पर पहुंच गई़, जो पांच साल का उच्च स्तर है। महिलाओं के मामले में बेरोजगारी दर उल्लेखनीय रूप से 8.7 प्रतिशत के उच्च स्तर पर जबकि पुरुषों के संदर्भ में यह 4.3 प्रतिशत है। पढ़े-लिखे युवा भी बेरोजगारी से अछूते नहीं रहे हैं। इनमें 25 फीसदी 20 से 24 वर्ष के हैं, तो 17 फीसदी 25 से 29 वर्ष के युवा हैं। हमें युवा शक्ति की सकारात्मक ऊर्जा का संतुलित उपयोग विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में करना होगा। यदि हम इस युवा शक्ति का सकारात्मक उपयोग करेंगे तो विश्वगुरु ही नहीं अपितु विश्व का निर्माण करने वाले विश्वकर्मा के रूप में जाने जाएंगे।

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