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लौटते जनविश्वास को ठेस न पहुंचाएं कांग्रेस नेता

मोदी ने अय्यर की ढीली गेंद पर पहले की तरह छक्का जड़ दिया है और देखना है।

Danik Bhaskar | Dec 09, 2017, 06:48 AM IST

अपनी तीखी जुबान के लिए मशहूर कांग्रेस के बुद्धिजीवी नेता मणिशंकर अय्यर ने 2014 के आम चुनाव की तरह इस बार गुजरात विधानसभा के चुनाव में भी गड़बड़ कर दी। पिछली बार उन्होंने तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘चायवाला’ कहा था और इस बार प्रधानमंत्री मोदी को ‘नीच’ कह दिया है। जाति, धर्म और क्षेत्र के स्वाभिमान को मुद्‌दा बनाने की कला में माहिर मोदी ने इसे गुजरात के स्वाभिमान का मुद्‌दा बना दिया है। मोदी ने अय्यर की ढीली गेंद पर पहले की तरह छक्का जड़ दिया है और देखना है कि यह निर्णायक शॉट साबित होता है या बीच में ही लपक लिया जाता है।

2014 के आम चुनाव में भी उन्होंने प्रियंका गांधी की तरफ से कहे गए ‘निचले स्तर की राजनीति’ के जुमले को पकड़कर जाति की राजनीति खेली थी। इस बार भी गुजरात चुनाव में शब्दों और बयानों से खेलने का सिलसिला जारी है और पहले राहुल गांधी के नाम पर सोमनाथ मंदिर के रजिस्टर में दर्ज `गैर हिंदू’ शब्द पर विवाद हुया और बाद में बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई 2019 के बाद करने की कपिल सिब्बल की दलील पर। भले ही कांग्रेस के भावी अध्यक्ष राहुल गांधी के सुझाव पर अय्यर ने माफी मांग ली है और पार्टी ने उन्हें निष्कासित भी कर दिया है लेकिन, नुकसान तो हो गया है।

गुजरात चुनाव में मजबूत पिच पर खड़ी कांग्रेस के लिए एक-एक शब्द अहम है। ऐसे में उसके हर नेता को सोच-समझकर बोलना चाहिए और राहुल गांधी व पार्टी की सुधरती छवि और उसमें लौटते जनता के विश्वास को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। शब्दों को घुमाने के साथ वाग्जाल की फिरकी कला में उस्ताद भाजपा नेताओं के समक्ष कांग्रेस कच्ची खिलाड़ी साबित हो रही है।

इसके बावजूद जनता को यह देखना होगा कि शब्दों के खेल और ऐतिहासिक तथ्यों की पक्षपातपूर्ण व्याख्या से कोई उसे छल न ले। एक सचेत जनमत सही और पुष्ट सूचनाओं के आधार पर राय बनाता है और भावुकता से दूर रहता है। गुजरात में इस बार भाजपा को अच्छे कामों और अच्छे दिनों के उदाहरण से ज्यादा शब्दों और भावनाओं का सहारा है। वह हिंदुत्व की प्रयोगशाला तो है लेकिन, अब महज उतने से काम नहीं चल रहा है। नोटबंदी, जीएसटी ने शासक दल के समक्ष यक्ष प्रश्न उपस्थित किए हैं और उनका उत्तर आसान नहीं है। अब देखना है कि मूल्यांकन शब्द के आधार पर होगा या काम के।