--Advertisement--

अहम के कारण स्मृति दोष हार का कारण

याददाश्त का चला जाना भी जीवन में पराजय का लक्षण हैं। तीन स्थितियों में मनुष्य स्मृति खो देता है।

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 07:01 AM IST
Due to the importance of memory defect

याददाश्त का चला जाना भी जीवन में पराजय का लक्षण हैं। तीन स्थितियों में मनुष्य स्मृति खो देता है। या तो बीमार हो जाए, दुर्घटना के प्रभाव से या फिर वृद्धावस्था के कारण। बुढ़ापे में स्मृति दोष होना स्वाभाविक है। दुर्घटना में याददाश्त चली जाए यह दुर्भाग्य है लेकिन, एक तीसरी स्थिति भी है जब आदमी अहंकार के कारण जान-बूझकर कुछ चीजें भूलने लगता है। रावण ऐसा ही कर रहा था। भरी सभा में जब अंगद से बात चल रही थी तो उसने उनका परिचय पूछा। अंगद ने जो परिचय दिया उस पर तुलसीदासजी ने लिखा, ‘अंगद नाम बालि कर बेटा। तासों कबहुं भई ही भेटा।। अंगद बचन सुनत सकुचाना। रहा बालि बानर मैं जाना।। मैं बाली का बेटा अंगद हूं। क्या आपकी कभी मेरे पिता बाली से भेेंट हुई है? अंगद की बात सुनते ही रावण सकुचाते हुए कहता है- हां मैं जान गया बाली नाम का एक बंदर था। रावण बाली से हारकर छह महीने उसकी बगल में दबा रहा था। उस पराजय और अपमान को छुपाने तथा सबके सामने वीरता का थोथा प्रदर्शन करने के लिए वह ऐसा अभिनय करता है जैसे उसे बाली याद भी है और नहीं भी। फिर पूछता है बाली कहां है आजकल? जबकि रावण को अच्छे से ज्ञात था कि श्रीराम बाली को मार चुके हैं। यह है अहंकार के कारण जान-बूझकर स्मृति दोष ले आना। हम लोग कई अवसर पर अपने अहंकार के कारण कुछ चीजें भूलने लगते हैं। मानकर चलिए अगर अहम के कारण स्मृति दोष है तो समझो आप अपनी पराजय की परिभाषा लिख रहे हैं।

X
Due to the importance of memory defect
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..