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अधिक जरूरी है आर्थिक और राजनीतिक सशक्तीकरण

हर साल दो चार राज्यों में चुनाव होते हैं, जिससे देश का संघीय ढांचा बहुत प्रभावित होता है।

Dainik Bhaskar

Jan 30, 2018, 05:23 AM IST

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बजट सत्र के अभिभाषण में सड़क निर्माण, किसानों की आय दोगुनी करने और रोजगार उत्पादन करने संबंधी सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं का वर्णन करने के साथ जिन दो प्रमुख बातों पर ध्यान दिया है उनमें संसद और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की मंशा और अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण करने की बजाय उनका सशक्तीकरण करना है।

निश्चित तौर पर यह दोनों मुद्‌दे सत्तारूढ़ भाजपा और विशेष तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने मुद्‌दे हैं और इन पर सहमति बनाना आसान नहीं है। प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों चैनलों को दिए अपने संपादकीय में कहा था कि एक साथ चुनाव कराने की वजह सिर्फ चुनाव खर्च ज्यादा होना ही नहीं है बल्कि चुनाव के दौरान बढ़ने वाली कटुता भी है। चुनाव के दौरान पक्ष और विपक्ष में बहस के दौरान तल्खी पैदा होती है। यह तब और बढ़ जाती है जब हर साल दो चार राज्यों में चुनाव होते हैं, जिससे देश का संघीय ढांचा बहुत प्रभावित होता है।

संसद-विधानसभा के चुनाव का सुर-ताल 1967 के बाद बिगड़ा और तब से ठीक ही नहीं हो पा रहा है। शायद भाजपा को यह भी लग रहा है कि अगर देशभर के चुनाव एक साथ हुए तो नरेंद्र मोदी जैसे ओजस्वी वक्ता और पार्टी की विशाल चुनाव मशीनरी के माध्यम से वे देश की केंद्रीय सत्ता और सभी राज्यों पर कब्जा कर लेंगे। लेकिन सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता के कारण इस देश के राजनीतिक ढांचे में एक प्रकार की बहुलता रहेगी। वह दूसरे आम चुनाव से झलकने लगी थी और तीसरे तक स्पष्ट हो गई थी। इसलिए इस मामले पर सभी दलों को कुछ न कुछ कीमत चुकानी होगी। दूसरा अहम मसला अल्पसंख्यकों का है और सरकार ने संकल्प जताया है कि वह तीन तलाक विधेयक हर कीमत पर इस सत्र में पारित करके रहेगी। सरकार को यह सोचना होगा कि वह अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण से परहेज करके तो धर्मनिरपेक्षता का भला कर रही है लेकिन, बहुसंख्यकों का तुष्टीकरण करके संविधान और देश दोनों का भला नहीं कर रही है। जहां तक अल्पसंख्यकों के सशक्तीकरण की बात है तो वह सांस्कृतिक और सामाजिक से ज्यादा राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र में किए जाने की आवश्यकता है। यह बात सभी वर्गों पर भी लागू होती है, जिसकी ओर एनडीए सरकार का ध्यान कम है।

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