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अाईएस के नाम पर सनसनी फैलाने को सख्ती से कुचलें

उसने शादी के बाद उसको जबरन इस्लाम कबूल करवाया और फिर उसे सऊदी अरब ले जाकर आईएस के हाथों बेचना चाहता था।

Danik Bhaskar | Feb 28, 2018, 12:40 AM IST

विडंबना है कि जब सीरिया और इराक में इस्लामी स्टेट की हार हो रही है तब भारत के दो राज्यों से उसकी छिटपुट मौजूदगी के समाचार मिले हैं। इसमें पहला तो उग्रवाद से लंबे समय से पीड़ित कश्मीर है और दूसरा गुजरात। अभी तक इस बात की कोई पुख्ता जांच नहीं हो सकी है कि इस्लामी स्टेट की वारदात का दावा करने वाली एजेंसी या व्यक्ति सही ही बोल रहे हैं लेकिन उसकी अनदेखी भी अच्छी नहीं होगी।

आईएस की समाचार एजेंसी ‘अल अमाक’ ने दावा किया है कि श्रीनगर के शूरा इलाके में हुर्रियत नेता फजल हक कुरैशी के घर के बाहर तैनात गार्ड की हत्या आईएस ने की थी। अल अमाक ने ऐसा दावा पिछले साल नवंबर में भी किया था, जब श्रीनगर के बाहरी इलाके जकूरा में हमला किया गया था। दूसरा समाचार गुजरात की एक महिला की ओर से एनआईए से की गई शिकायत से पैदा हुआ है। महिला ने अपने पति पर आरोप लगाया है कि उसने शादी के बाद उसको जबरन इस्लाम कबूल करवाया और फिर उसे सऊदी अरब ले जाकर आईएस के हाथों बेचना चाहता था।

इन दोनों दावों की खुफिया एजेंसियां पुष्टि करने में लगी हैं लेकिन उन्हें इन दावों में अलग-अलग पेंच नजर आते हैं। उधर, कश्मीर में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण लश्कर-ए-तय्यबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन कमजोर पड़े हैं। उन्हें भर्ती के लिए नए युवक नहीं मिल रहे हैं।

इस बीच सरकार ने सुरक्षा बलों को यह भी आदेश दिया है कि वे बड़े आतंकियों के जनाजे में उमड़ती भीड़ पर अंकुश लगाएं, क्योंकि वहां आने वाले युवाओं को आतंकी संगठन अपनी भरती के लिए फुसलाते हैं। इन सख्त स्थितियों में आतंकी गुटों की रणनीति नए और ज्यादा चर्चित नामों से काम करने की हो सकती है ताकि उनकी ओर युवा आकर्षित हों।

कश्मीर में अल कायदा और इस्लामी स्टेट की शाखाएं कायम करने की खबरें पिछले एक साल से आ रही हैं और उनमें अल कायदा के लिए जाकिर मूसा तो इस्लामी स्टेट के लिए ईसा फैजली का नाम चल रहा है। इस तरह के समाचार सनसनी फैलाने का तरीका भी हो सकते हैं और इनमें कुछ सच्चाई भी हो सकती है। इनकी रोकथाम सुरक्षा बलों द्वारा सख्ती बरतने के साथ सरकारी विभागों की चौकसी से होगी।