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युवा आबादी का लाभ लेना है तो सेहत पर खर्च बढ़ाएं

स्वच्छता में बिज़नेस करने को आसान बनाना होगा

नैनालाल किदवई, मेधावी शर्मा | Last Modified - Jan 31, 2018, 05:43 AM IST

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    नैनालाल किदवई चेयरपरसन, इंडिया सेनिटेशन कोएलिशन, पूर्व अध्यक्ष एफआईसीसीआई

    बुनियादी बदलाव लाने वाले युग की शुरुआत करते हुए सरकार हमारे राष्ट्र को उच्च वृद्धि के मार्ग पर ले जा रही है खासतौर पर सामाजिक क्षेत्र में। आइए बजट पेश होने के पहले सामाजिक क्षेत्र की मुख्य चुनौतियों और समाधानों पर एक नज़र डालें।


    स्वास्थ्य रक्षा :बीमारियों का अधिक बोझ होने के बाद भी भारत स्वास्थ्य रक्षा के क्षेत्र में न्यूनतम सार्वजनिक निवेश वाले देशों में से हैं। कुछ अनुमानों में तो इसे जीडीपी का सिर्फ 1.5 फीसदी ही बताया गया है। यदि बीमारियों का अत्यधिक बोझ हमारे श्रमबल की उत्पादकता घटाने का कारण बनता है तो भारत को विशाल युवा आबादी के कारण मिलने वाले लाभ पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। जहां स्वास्थ्य क्षेत्र को आवंटन बढ़ाने पर आम सहमति रही है, राज्यों द्वारा मौजूदा फंड का पूरा उपयोग न कर पाना दुर्भाग्यपूर्ण हकीकत है। इसलिए विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य रक्षा फंड के बेहतर उपयोग और प्रबंधन की मांग की है।


    शिक्षा एवं उद्यमशीलता :उचित शैक्षणिक कौशल और जॉब निर्माण करने से भारत की वृद्धि तेज होगी।

    हाल में जारी की गई ‘असर’ की रिपोर्ट शिक्षा मंें बुनियादी बदलाव लाने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत को रेखांकित करती है। पूर्व निर्धारित मानकों पर राज्य द्वारा संचालित संस्थानों को प्रोत्साहन देने के लिए परफार्मेंस मेट्रिक्स का इस्तेमाल, शिक्षक-प्रशिक्षण में पूरी तरह सुधार लाकर उसे अधिक प्रासंगिक बनाना ऐसे कुछ तरीके हैं, जो शिक्षा को आधुनिक बनाने और इस मुद्‌दे पर गौर करने के लिए अपनाए जा सकते हैं। जॉब की बात है तो नए उभरते पर्यावरण अनुकूल हरित बाजार नई संभावनाएं उपलब्ध करा सकते हैं। इसके लिए अक्षय ऊर्जा, स्वच्छता, वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट आदि क्षेत्रों में सेवाएं देने का बिज़नेस चलाने के लिए आवश्यक उद्यमशीलता विकसित करने पर पर्याप्त जोर देने की जरूरत होगी।


    महिला एवं बाल विकास : महिला और बाल कल्याण में सुधार को महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया जाता रहा है, जिसे अधिक बजट आवंटन और नए संस्थानों के निर्माण से बल दिया जा रहा है। जैसे पिछले साल महिला शक्ति केंद्र स्थापित किए गए थे। उद्‌देश्य था ग्रामीण महिलाओं को एक ही जगह कौशल विकास, रोजगार, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य व पोषण जैसे अवसर मुहैया कराकर ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए सहायक सेवाएं केंद्रित की जा सकें। बजट का अपर्याप्त या बिल्कुल उपयोग न होना चिंता का क्षेत्र है जैसे 2013 में गठित 1000 करोड़ रुपए का निर्भया फंड महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की समस्या के समाधान की तत्काल आवश्यकता होने पर भी खर्च ही नहीं हो सका है। महिलाओं में डिजिटल साक्षरता में सुधार और समन्वित बाल विकास योजना (आईसीडीएस) जैसी योजनाओं के तहत सेवाएं देने में आ रही अड़चनें दूर करना निर्णायक होगा।


    पानी और स्वच्छता :बाल मृत्यु, वृद्धि में रुकावट और जीवन की गुणवत्ता पर सीधा असर होने से मौजूदा सरकार के तहत स्वच्छता पर ऐतिहासिक रूप से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पिछले बजट के बाद से टॉयलेट के निर्माण और उसके उपयोग में अत्यधिक प्रगति हुई है। जैसे 28 जनवरी 2018 तक स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण के तहत 6 करोड़ से ज्यादा घरेलू टॉयलेट बनाए गए हैं और 3 लाख से ज्यादा गांव खुले में शौच जाने से मुक्त घोषित किए गए हैं। स्वच्छता के इस जनांदोलन को आगे बढ़ाने पर मुख्य फोकस होना चाहिए। इसे मजबूत करने के लिए गांव के स्तर पर वेस्ट मैनेजमेंट और शहरी संदर्भ में मल प्रबंधन पर बजट में ध्यान दिया जाना चाहिए।


    फिर जहां सेनिटरी नेपकिन पर 12 फीसदी जीएसटी को लेकर बहस चल रही है, देश में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन की असंतोषजनक अवस्था पर ध्यान देना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि किशोरियों की सेहत व कल्याण पर इसका सीधा असर पड़ता है। अंत में कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए स्वच्छता में ‘बिज़नेस या सीएसआर करने की आसानी’ निर्मित करने के लिए यह बिल्कुल सही वक्त है। कई भागीदारों के सहयोग की व्यवस्था बनाकर यह किया जा सकता है। 2015 की शुरुआत में स्थापित इंडिया सेनीटेशन कोएलिशन इसी दिशा में काम करता है। निर्माण, उपयोग, रखरखाव और शोधन के पूरे स्वच्छता तंत्र के समाधान के लिए यह कई संगठनों को एकसाथ लाता है।

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    मेधावी शर्मा प्रोग्राम मैनेजर, इंडिया सेनिटेशन कोएलिशन
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