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डब्ल्यूटीओ के सेतु पर भारत और पाकिस्तान के रिश्ते

खास बात यह है कि जीएफएटीएफ की चेतावनी पर चीन ने खामोशी का रुख अपना लिया है।

Dainik Bhaskar

Feb 27, 2018, 07:57 AM IST
India and Pakistan relations on the WTO bridge

भारत और पाकिस्तान के बिगड़े संबंधों को सुधारने की एक पहल मार्च में उस समय होने की संभावना है, जब डब्ल्यूटीओ के मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में हिस्सा लेने पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्री परवेज मलिक भारत आएंगे। मलिक ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया है और उनके आगमन के बाद पाकिस्तान में होने वाली सार्क देशों की बैठक में भारत के भी भाग लेने की उम्मीद है। भारत और पाक के रुख में आए इस बदलाव के पीछे परदे के पीछे चल रही वार्ताओं का योगदान तो है ही साथ में अंतरराष्ट्रीय दबावों की भी अपनी भूमिका है।

ग्लोबल फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (जीएफएटीएफ) ने पाकिस्तान को निगरानी सूची में रखते हुए चेतावनी दी है कि अगर उसने सरकारी स्तर पर आतंकियों को मदद देना बंद नहीं किया तो उसकी आर्थिक मदद रोकी जाएगी। खास बात यह है कि जीएफएटीएफ की चेतावनी पर चीन ने खामोशी का रुख अपना लिया है।

इसका मतलब है कि पाकिस्तान की आतंक को समर्थन देने की रणनीति के खिलाफ भारतीय राजनय ने दुनिया में एक वातावरण निर्मित किया है। भारत चाहता है कि पाकिस्तान से संबंधों के मोर्चे पर वह अमेरिका पर ही निर्भर रहने की बजाय स्वतंत्र पहल भी करे। हालांकि पाकिस्तान ने हाफिज सईद और जकीउर रहमान लखवी जैसे आतंकियों को रिहा करके और पठानकोट हमले के बारे में कोई कार्रवाई न करके भारत को चिढ़ाने का कोई मौका छोड़ा नहीं है।

यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह इंतजार कर रहे हैं कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खकन अब्बासी कोई ऐसा रुख अपनाएं जिससे भारत को उनसे संबंध सुधारने का औचित्य समझ में आए। आशा की जा रही है कि दोनों देश संवाद शुरू करने का माहौल बनाने के लिए उन कैदियों को रिहा भी करेंगे जो अपनी सजाएं काट चुके हैं और सेहत की दृष्टि से कमजोर हैं। ऐसे कैदियों में तकरीबन 51 औरतों और बच्चों का जिक्र किया जा रहा है।

एनडीए सरकार चाहती है कि अपने कार्यकाल के आखिरी वर्ष में वह संबंध सुधारने का उपाय करे और इसलिए वह बहुपक्षीय बैठकों में पाकिस्तान के साथ एक मंच पर आने के लिए सहमत हो रही है। अगर इन कोशिशों से तनाव कुछ कम होता है तो इसका निश्चित तौर पर स्वागत होना चाहिए।

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