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अंगद जैसी संवाद कला से बाजी जीतें

आप जोबोल रहे हों और यदि उन शब्दों का अर्थ मालूम नहीं है तो समझो सिर्फ बकवास कर रहे हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2018, 08:34 AM IST
jeene ki raah by pandit vijay shankar mehta
आप जोबोल रहे हों और यदि उन शब्दों का अर्थ मालूम नहीं है तो समझो सिर्फ बकवास कर रहे हैं। जब आपके शब्दों किसी महत्वपूर्ण परिणाम के लिए हो या किसी विशेष स्थिति में बोले जा रहे हों तो बिना अर्थ जाने मत बोलिएगा। रावण की सभा में उसे समझाते हुए अंगद के शब्द और बॉडी लैंग्वेज बता रही थी कि वे निर्भीक होकर हर शब्द का अर्थ समझते हुए बात कर रहे हैं। यहां तुलसीदासजी ने लिखा है, ‘कह दसकंठ कवन तैं बंदर। मैं रघुबीर दूत दसकंधर।। मम जनकहि तोहि रही मिताई। तव हित कारन आयउॅं भाई।। जब रावण ने पूछा अरे, बंदर तुम कौन हो? तब अंगद ने बताया मैं श्री रघुवीर का दूत हूं। मेरे पिता तुम्हारे मित्र थे, इसलिए हे भाई, मैं तुम्हारी भलाई के लिए आया हूं। अंगद ने शुरूआत में ही अपना परिचय रामदूत के रूप में दिया। राम एक प्रकाश हैं। प्रकाश पर टिकिये और फिर परिणाम दीजिए। इसके बाद अंगद ने रावण को जैसे समझाया वह तो कमाल का था। ‘उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती। सिव बिरंचिं पूजेहु बहु भांती।। बर पायहु कीन्हेहु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा।। ‘तुम उत्तम कुल से हो, शिवजी और ब्रह्माजी से श्रेष्ठ वर पाएं हैं। तुमने तो लोकपाल और अन्य राजाओं पर विजय प्राप्त की है। आपके साथ इतनी योग्य स्थितियां जुड़ी हैं तो आपको अच्छी बात समझना चाहिए। विषय की प्रस्तुति में सामने वाले को प्रोत्साहित करते हुए बात में वजन लाना एक कला है। अंगद की तरह जिन्हें संवाद की कला आती हो वो आधी बाजी तो वैसे ही जीत जाते हैं।
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jeene ki raah by pandit vijay shankar mehta
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