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आदर्श प्रस्तुत करना भी लीडर का काम

एक कर्णधार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है भविष्य में आने वाली पीढ़ी के लिए कोई आदर्श प्रस्तुत कर सके।

Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 07:00 AM IST

लीडर का काम केवल वर्तमान को नेतृत्व देना ही नहीं है। एक कर्णधार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है भविष्य में आने वाली पीढ़ी के लिए कोई आदर्श प्रस्तुत कर सके। नेतृत्व में अपने आप में एक भविष्य छुपा होता है। जो नेतृत्व अपनी ही जिम्मेदारी नहीं समझता वह भविष्य के लिए खतरनाक है। ऐसे लोग अपने गलत निर्णयों को भी सही साबित करने के लिए अपनी छवि, अपने ज्ञान का उपयोग करते हैं। रावण ऐसा ही कर रहा था। जब अंगद ने सख्त लहजे में बात की तो वह जानता था कि इस युवा के तर्कों का मेंरे पास स्पष्ट उत्तर नहीं है।

तुलसीदासजी ने इस दृश्य पर लिखा है-‘सुनि कठोर बानी कपि केरी। कहत दसानन नयन तरेरी।। खल तव कठिन बचन सब सहऊॅ। नीति धर्म मैं जानत अहऊॅं।। अंगद की कठोर बातें सुन रावण कहता है- रे दुष्ट वानर, तेरी बातें इसलिए सह रहा हूं कि मैं नीति और धर्म को बहुत अच्छे से जानता हूं और उसी की रक्षा कर रहा हूं। कमाल की बात है, जबकि रावण का सारा आचरण नीति और धर्म के विरुद्ध था।

दरअसल, वह नीति और धर्म के फर्क को मिटा चुका था। रावण ने हिंसा धर्म अपना लिया था। लूट, अपहरण, छल इन्हीं सबको उसने धर्म मानते हुए इस पर चलने के लिए जो तरीके अपनाए थे, उनको नीति बताकर उसके पक्ष में दलील दे रहा था। आज भी बहुत से लोग ऐसे हैं जो अपने अनुचित आचरण को नीति और धर्म का जामा पहनाकर लोगों को भ्रम में डाल रहे हैं, प्रताड़ित कर रहे हैं। ऐसे कुटिल लोगों से सावधान रहना होगा।

-जीने की राह कॉलम पं. विजयशंकर मेहता जी की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें JKR और भेजें 9200001164 पर