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जीने की राह कॉलम: पं. विजयशंकर मेहता खुशी बांटकर ही खुश रहना सीख पाएंगे

जीने की राह कॉलम पं. विजयशंकर मेहता जी की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें JKR और भेजें 9200001164 पर

Dainik Bhaskar

Mar 10, 2018, 05:34 AM IST
jeene ki rah column on 10 march

खुश रहना, खुश रखना और खुशी बांटना, अलग-अलग बातें हैं। चलिए, देखते हैं ये तीनों काम कैसे किए जाएं। सबसे पहले तो खुश रहना शुरू करें। इसे आसान न समझें। हमने अपनी खुशी का रिमोट दूसरों के हाथ में दे रखा है। ज्यादातर हमारी खुशी अन्य लोगों से संचालित होती है। कोई हमसे कहता है- आप बहुत अच्छे हैं और हम दिनभर के लिए प्रसन्न हो जाते हैं। जरा-सी विपरीत टिप्पणी हुई कि हमारा दिमाग खराब हो जाता है। लोग तय ही नहीं कर पाते कि हम हैं क्या? यह भी दूसरों से तय कराते हैं।

यदि स्वयं को जानने की इच्छा जाग्रत कर लें तो आप खुश रहना सीख जाएंगे। जब खुश रहना सीख जाएं तो पहला काम यह करें कि दूसरों को खुश रखें। खुश रहना आसान है पर खुश रखना कठिन है। अपने लोगों से ठीक से जान-पहचान हो जाए तो आप उन्हें खुश रख सकते हैं। खुश रहना और खुश रखना, इसमें पहला स्वयं को जानना और दूसरे में अपनी जान-पहचान के लोग आएंगे। लेकिन एक तीसरा काम भी है- खुशी बांटना। यह अनजान लोगों के बीच करना पड़ता है। खुशी बांटने के लिए कोई बहुत संसाधन नहीं अपनाना है।

इसके लिए बस बड़ा दिल चाहिए। खुश रहना, रखना और खुशी बांटना इन तीनों का तालमेल बन गया तो मानकर चलिए आप जीवन के समापन तक खुशियों का इतना बड़ा बैंक बना चुके होंगे कि जब विदा होंगे तो लोग मानकर चलेंगे कि ये इतना कुछ दे गए कि इनके जाने के बाद अब पता चला कि खुशी का सही मतलब क्या है।

जीने की राह
पं. विजयशंकर मेहता
humarehanuman@gmail.com

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