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जीने की राह कॉलम: मन से कटेंगे तभी बुद्धि स्वतंत्र होगी

जीने की राह कॉलम पं. विजयशंकर मेहता जी की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें JKR और भेजें 9200001164 पर।

Dainik Bhaskar

Mar 15, 2018, 04:16 AM IST
jeene ki rah column on 15 march

अधिकार मिल जाए तो मूक भी हुक्म देने लगते हैं। मूक लोगों के हुक्म की जुबान वाले तामिल करते भी देखे गए हैं। यह बात बाहर की स्थिति के लिए नहीं कही जा रही है। हमारे भीतर एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें मन को गूंगा कहा है और मन जो आदेश देता है, बुद्धि वह काम करने लगती है। मन को मूल रूप से गूंगा मानिए। गूंगा यानी जिसके पास अपनी कोई वाणी नहीं होती। मन के पास अपना न तो कोई अस्तित्व है, न पहचान, न वाणी है। हम अपने विचारों और स्मृतियों से मन को ये सब दे देते हैं। इसलिए इस गूंगे को थोड़ा अपने भीतर पहचानिए वरना ये ऐसे-ऐसे हुक्म देता है कि आप उसके पीछे चल पड़ते हैं।

इस पर तब जरूर काम कीजिए जब आप तनाव में हों, क्योंकि मन के कहे पर चलेंगे तो आप निश्चित रूप से दबाव में भी आएंगेे और तनाव भी घेरेगा। जब तनाव चरम पर पहुंच जाए, कुछ समझ न आ रहा हो कि क्या करें, आपको किसी ताकत की जरूरत हो तो उस समय आपकी एक ही ताकत है और वह होगी मन को महत्व देना बंद कर दें।

जैसे ही मन का महत्व समाप्त करते हैं, भीतर एक शक्ति जाग जाती है और तब आप उस तनाव का सामना करने में समर्थ होंगे। मन से कटेंगे तब ही बुद्धि स्वतंत्र होगी और तब जाकर हृदय कुछ ऐसी बात बुद्धि को कह सकेगा जो जरूरी है। यहीं से शरीर भी सांस के जरिये मदद करेगा और फिर किसी भी तनाव से निपटने के लिए आपकी सीमा असीम हो जाएगी।

जीने की राह

पं. विजयशंकर मेहता
humarehanuman@gmail.com

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