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प्रोजेक्ट मंजूरी की प्रक्रिया सरल व होम लोन सस्ता हो

मकान पर टैक्स रियायत पांच लाख तक बढ़ानी होगी

Jokshak Shah | Last Modified - Jan 28, 2018, 01:42 AM IST

प्रोजेक्ट मंजूरी की प्रक्रिया सरल व होम लोन सस्ता हो


बजट भारतीय रियल एस्टेट के अत्यधिक निर्णायक बिंदु पर आ रहा है। बदलाव के लगातार चले दौर और पिछले 12 माह की अवधि में इसके स्टेकहोल्डरों द्वारा टिके रहने की क्षमता दिखाए जाने के बाद अब व्यापक स्तर पर माना जा रहा है कि सुधारों के लागू करने से जो नया आधार रखा गया है वह इस इंडस्ट्री के लिए वृद्धि और विकास लेकर आएगा। 2017 में उठाए गए कदम इस सेक्टर को उछाल मारता देखने के हिसाब से छोटे कदम रहे, जबकि यह रोजगार देने वाला सबसे बड़ा सेक्टर है और देश की जीडीपी में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। रियल एस्टेट की वृद्धि से कई अन्य उद्योगों पर साकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिनमें से कई तो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपने अस्तित्व के लिए इसी सेक्टर पर निर्भर हैं।


पिछले बजट में सरकार ने किफायती आवास के सेगमेंट को बुनियादी ढांचे संबंधी उद्योग का दर्जा देने का क्रांतिकारी फैसला लिया था, जिसने इस उद्योग के लिए 2017 में तरक्की की दिशा तय कर दी। इसके साथ आरईआरए (रियल एस्टेट रेग्यूलेशन एंड डेपलपमेंट एक्ट) लागू होने से सरकार का यह इरादा जाहिर हुआ कि वह इस उद्योग के सभी भागीदारों के लिए नियम आधारित व अत्यधिक पारदर्शी वातावरण बनाना चाहती है। अब सरकार के सामने अवसर है कि वह तरक्की को जारी रखते हुए अन्य नीतियां लाएं या उन्हें मॉडिफाई करे, जो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री की दीर्घावधि तरक्की और विकास के लिए अच्छा होगा और मौजूदा सुस्ती से उबरेगा।


प्रोजेक्ट की लागत घटाने के लिए जीएसटी दर में कटौती

निर्माणाधीन प्रापर्टी पर 12 फीसदी की मौजूदा दर पुरानी व्यवस्था की तुलना में अधिक है। फिर सेक्टर में स्टैम्प ड्यूटी शुल्क भी जारी है, जिसे ग्राहक वहन करता है। सरकार को इस संबंध में कोई व्यावहारिक समाधान निकालना होगा। रियलिटी सेक्टर में इनपुट टैक्स क्रेडिट के ऑपरेशनल मैकेनिज्म को भी इसे लागू करने को लेकर और स्पष्टता की जरूरत है। फिर किफायती आवास के सेगमेंट को 5 फीसदी के ब्रेकेट में लाने की जरूरत है।

घर खरीदने वालों को इन्सेंटिव

मकान खरीदने वालों को धारा 80 सी के तहत मौजूदा 2 लाख रुपए की जगह 5 लाख रुपए की टैक्स रियायत देनी चाहिए। यह कदम मकान खरीदने वालों को रियल एस्टेट प्रॉपर्टी खरीदने के लिए प्रोत्साहन देगा और इंडस्ड्री की तरक्की की रफ्तार बढ़ेगी।

निजी डेवलपरों के लिए फंडिंग

किफायती आवास के प्रोजेक्ट का जहां तक सवाल है, निजी निवेशकों को लैंड फाइनेंसिंग के लिए पर्याप्त और उचित फंडिंग सुुविधाएं दी जानी चाहिए। इससे इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र के खिलाड़ियों की भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा, जो ‘2022 तक सबको आवास’ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्य और महात्वाकांक्षा के अनुरूप होगा।

एकल खिड़की मंजूरी को अमल में लाना

एक ही खिड़की से सारी मंजूरियों की प्रणाली अमल में लाने से लंबी चलने वाली प्रक्रियाओं और अनुपालन की समस्या का समाधान हो जाएगा, जिनका पालन अपने प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी प्राप्त करने में डेवलपर को करना पड़ता है। आज मुंबई की बात करें तो डेवलपर को अपना प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कम से कम 199 मंजूरियां प्राप्त करनी पड़ती है। इसमें एक से लेकर तीन साल तक का वक्त लग सकता है। एकल खिड़की प्रणाली लागू हुई तो यह प्रक्रिया सरल और तेज हो जाएगी। इसके तहत डेवलपर को आवश्यक मंजूरियां एक से दो माह में मिल जाएंगी। समय और पैसे में जो बचत होगी उसका लाभ मकान खरीदने वालों तक पहुंचेगा। वे समय पर मकान खरीद सकेंगे और इस प्रक्रिया में उनकी बचत बढ़ेगी।

इंडियन रियल्टी को उद्योग का दर्जा देना

पूरे रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा देने से इस उद्योग को आगे बढ़ने का नया बल मिलेगा। इससे डेवलपर कम दरों पर पैसा जुटा पाएंगे और इससे उनके प्रोजेक्ट की लागत घटेगी अौर इस सेक्टर को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। कहना न होगा कि इन सारे कदमों से अंतत: फायदा मकान खरीदने वाले आम ग्राहक को ही मिलेगा।


होम लोन पर ब्याज की दरों में कटौती

12लाख रुपए तक के लोन को कम ब्याज दर का फायदा दिया गया है। जहां यह सही दिशा में उठाया कदम है वहीं, इस राशि को अच्छा-खासा बढ़ाए जाने की जरूरत है ताकि अधिक बड़े तबके को फायदा पहुंचाया जा सके। हाउसिंग लोन पर ब्याज दरों में न्यूनतम 200 बेसिस पॉइंट की कमी लाने की जरूरत है ताकि मांग को तेज किया जा सके।

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Web Title: project manjoori ki prkriyaa srl v hom loan sasta ho
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