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आधार की अनिवार्यता और परेशानियों से सबक लेने होंगे

निःसंदेह आधार कार्ड अनिवार्यता का बढ़ता दवाब लोगों को मौत की और धकेल रहा हैं।

Danik Bhaskar | Feb 03, 2018, 07:08 AM IST
देवेंद्रराज सुथार देवेंद्रराज सुथार

हाल ही में उत्तर प्रदेश में एक गर्भवती महिला को महज आधार कार्ड न होने पर डॉक्टर ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। जिसके बाद महिला को मेडिकल सेंटर के दरवाजे पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। इससे पहले हरियाणा के सोनीपत में ऐसा ही मामला सामने आया था। निःसंदेह आधार कार्ड अनिवार्यता का बढ़ता दवाब लोगों को मौत की और धकेल रहा हैं।


कुछ दिन पहले रिपोर्ट में दिखाया गया कि राजधानी दिल्ली में ही कई ऐसे परिवार हैं, जिन्हें आधार की वजह से राशन नहीं मिल पा रहा है। दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 26,201 लोगों को फिंगर प्रिंटर न मिलने की वजह से राशन मिल रहा हैं। आधार कार्ड से सत्यापन के लिए विभिन्न समस्याएं सामने आ रही हैं। एक परिवार में यदि 7 सदस्य हैं तो मशीन द्वारा केवल 3 या 4 व्यक्तियों की पहचान करना जैसी समस्याएं शामिल हैं। बुनियादी ढांचे के अलावा असफलताओं के इस अनुभव से सरकार को सीखना चाहिए था कि प्रौद्योगिकी अपनाना भ्रष्टाचार मिटाने का अकेला रामबाण उपाय नहीं है।


इस तरह की समस्याओं के और भी उपाय हो सकते हैं, जिसके लिए सबसे पहले हमारे व्यवस्थागत ढांचे को ही सुधरना होगा। साधारण नागरिक के लिए आधार का सबसे चिंताजनक पहलू है बायोमेट्रिक डेटा नियंत्रण। आधार संख्या का उपयोग हर जगह अनिवार्य करने से रोकना होगा। किसी भी उद्देश्य के लिए किसी व्यक्ति की पहचान किसी भी तरह से उजागर नहीं होनी चाहिए, लेकिन आधार सभी व्यक्तियों की गोपनीयता पूरी तरह खत्म करता है।


इसके अलावा सभी सिम ग्राहकों को ग्राहक पहचान मॉड्यूल से जोड़ना कई सवाल उठाता है। न केवल जनसांख्यिकीय, बल्कि बायोमेट्रिक डेटा भी जो निजी होना चाहिए, पूरी तरह से सार्वजनिक किया जा रहा है। दुःख की बात तो ये है कि सभी कल्याणकारी योजनाओं में आधार अनिवार्य होने से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले अधिकतर वही लोग हैं जिन्हें योजनाओं की सबसे अधिक जरूरत है। पर वे ही इन योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।