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देश की सेहत सुधारने के लिए बीमा से ज्यादा प्रभावी तंत्र जरूरी

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को विकसित करने पर जोर देना होगा, जिससे बड़े अस्पतालों में भीड़ कम होगी।

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2018, 05:36 AM IST
महेश कुमार सिद्धमुख, 22 महाराजा गंगासिंह  यूनिवर्सिटी, बीकानेर महेश कुमार सिद्धमुख, 22 महाराजा गंगासिंह यूनिवर्सिटी, बीकानेर

बजट में वित्तमंत्री ने स्वास्थ्य बीमा योजना को लागु करने का एजेंडा देश के सामने रखा, जिसमंे प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपए तक स्वाथ्य बीमा दिया जाएगा। किंतु इस योजना को धरातल पर उतारना बड़ी चुनौती है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों का इलाज करना होगा,जो मरीजों का इलाज करने लायक बन सकें। रोगी छोटे जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं ले पाते हैं, इसलिए राजधानी के अस्पताल में इलाज करवाना चाहते हैं। वहां भीड़ ज्यादा होने से मरीज को महीनों इंतजार करना पड़ता है। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को विकसित करने पर जोर देना होगा, जिससे बड़े अस्पतालों में भीड़ कम होगी।


अस्पतालों से बाहर दुकानों द्वारा कमीशन की खबरें आती रहती हैं। निजी अस्पतालों में मनमानी कीमतों पर रोकथाम के लिए जांच, दवाई के न्यूनतम मूल्य भी निर्धारित करें। फिर दिनोंदिन मेडिकल की पढ़ाई महंगी होती जा रही है। अभी भी भारत में लाखों डॉक्टरों की कमी है। मौजूदा व्यवस्था में तो 1000 मरीजों पर 1 डॉक्टर नहीं मिल पाता है। ऐसे में ज्यादा मरीजों के भार से डॉक्टर भी मानसिक दबाव में होते है। यही वजह है कि भारत के स्वास्थ्य का भविष्य ज्यादातर झोलाछाप डॉक्टरों के हाथों में है। आयुर्वेद पर खर्च बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे रोगों के रोकथाम पर बल दिया जा सके।


स्वास्थ्य बीमा योजना जहां एक अच्छा कदम है लेकिन, यह इस आशंका पर आधारित है कि कहीं सेहत को कोई खतरा हो तो उसका उपचार हो सके। फिर आशंका है कि इसका लाभ कॉर्पोरेट अस्पतालों को ही मिलेगा। दरअसल, देश में स्वास्थ्य की समस्या को संपूर्णता की दृष्टि से देखना होगा। इसमें स्वास्थ्य को पहुंचने वाले प्रदूषण जैसे खतरे, खाद्य पदार्थों में मिलावट, पोष्टिक आहार, पोलिथीन व कैंसर का खतरा पैदा करने वाली अन्य चीजों के प्रयोग आदि को देखना होगा। तभी अच्छे नतीजे प्राप्त होंगे। जिलों में चिकित्सा की दृष्टि से ब्लॉक बना देना चाहिए, जिस पर एक चिकित्सा केंद्र हो और उसे दायित्व सौंपा जाए कि उसके क्षेत्र में बीमारियां नहीं होनी चाहिए।

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महेश कुमार सिद्धमुख, 22 महाराजा गंगासिंह  यूनिवर्सिटी, बीकानेरमहेश कुमार सिद्धमुख, 22 महाराजा गंगासिंह यूनिवर्सिटी, बीकानेर
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