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सच-झूठ की परख हो तो मोह छूटता है

जलियांवाला बाग से राष्ट्र के लिए काम करने की प्रेरणा मिली

Maninderjeet Singh Bitta | Last Modified - Dec 18, 2017, 06:58 AM IST

  • सच-झूठ की परख हो तो मोह छूटता है
    मनिंदरजीत सिंह बिट्‌टा, चेयरमैन, ऑल इंडिया एंटी टेरेरिस्ट फ्रंंट, पंजाब के पूर्व मंत्री

    हमारी सबसे बड़ी जो समस्या है इस राष्ट्र के अंदर, दुनिया के अंदर, पावरफुल लोग, बड़े बिज़नेस मैन लोग। अपनी सोच को दो सौ साल आगे ले जाएंगे कि ये बनेंगे, वो बनेंगे। मौत एक दिन आनी है। यह सत्य मुझे बहुत सुख देता है, शांति देता है। मेरा दूसरा ध्येय है राष्ट्र से प्रेम। तीसरा, शरीर को मंदिर समझना। शरीर ठीक है तो सब काम कर लोगे। चौथा, हमेशा ईश्वर की याद में रहना। सुबह उठकर मेरे लड़के सबसे पहले गायत्री मंत्र की सीडी बजाते हैं। हनुमान चालीसा। शबद कीर्तन। एयरपोर्ट से शहर जा रहे हैं कैसेट लगा दी। कभी-कभी भगत सिंह जी की कैसेट। सुनता रहता हूं। कोई विचार नहीं आता। जिसने झूठ और सच की परख कर ली उसे भीड़-भड़क्का कुछ अच्छा नहीं लगता। मोह छूट जाता है। भजन चल रहा है तो भगवान मेरे साथ है, दुनिया की मुझे जरूरत ही नहीं।


    यह जो अलिप्तता का भाव है यह तब पैदा हुआ जब मुझ पर अमृतसर में बम हमला हुआ। मुझे पीजीआई चंडीगढ़ लाया गया। मेरी माताजी ने उस वक्त एक सीडी लगा दी, जिसका नाम था ‘हम आदमी एक दम के, पल की ख़बर नहीं।’ एक अन्य सीडी थी ‘पाप न कर बंदे।’ मैं 1992 की बात बता रहा हूं। मुझसे मिलने मुख्यमंत्री बेअंतसिंह आए मैंने उनसे कहा, ‘सरदारजी मेरे पास तीन पोर्टफोलियो हैं। मुझे विदाउट पोर्टफोलयो कर दो।’ हमने उन्हें यह नहीं बताया कि ऐसा क्यों कर दो। पीएम साहब का फोन आया तुम्हें दो डिपार्टमेंट और देना है। मैंने कहा विभाग ले लेंगे तो सुरक्षा वगैरह बनी रहेगी, प्रोटोकॉल चलता रहेगा। क्यों किया? इसकी ट्रान्सफर 500 किलोमीटर दूर कर दो। अब किसी की वाइफ अकेली है। पिताजी का ध्यान रखना है। क्यों किसी की बददुआ लेना। फिर राजनीति भी छोड़ दी कि हमारे से पाप न हो जाए। लेकिन, जो भजन की बात मैंने बताई वह चार-पांच साल पहले की बात है। मैं अब भगवान बिना रह ही नहीं सकता।


    जहां तक देशभक्ति की बात है मैं सात साल की उम्र में दादाजी के साथ जलियांवाला बाग जाया करता था। वहां कुछ लोहे के निशान थे। मैंने पूछा यह क्या है तो उन्होंने बताया कि ये जनरल डायर द्वारा चलवाई गोलियों के निशान है, जिसमें हिंदू-सिख मारे गए थे। फिर उन्होंने जलियांवाला बाग, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस आदि की किताबें दीं। इन सबका ऐसा असर हुआ कि जहां दादाजी ने जलियांवाला बाग गोली कांड की बात बताई थी, आज़ादी कैसे मिली यह बताया था, तो मैंने वहीं खड़े रहकर शपथ ली कि आप लोगों ने आज़ादी तो दिला दी, कभी मौका पड़ा तो हम इस आज़ादी की रक्षा करेंगे। ज़िंदगी की शुरुआत हो गई। 15 अगस्त और 26 जनवरी मनाना शुरू किया। 10-12वीं में या शायद उससे आगे कि बात है कि भिंडरावाला हरमंदर साहब में आ गया। तब मैं कांग्रेस सेवादल का सदस्य था। 15 अगस्त आया तो वहां के जो एसएचओ थे तो उन्होंने कहा कि इस बार झंडा हरमंदर साहब के सामने मत लहराना, कहीं अौर लहराना। आतंकवादियों ने कहा है कि बिट्टा झंडा लहराएगा तो बम फेंक देंगे। 1982 की बात है। मैंने कहा हमने तो शपथ ली है। तिरंगा झंडा राष्ट्र का है। हम खालिस्तान का झंडा नहीं लहरा रहे हैं। हमें 12 बजे झंडा लहराना था तो 5 बजे मेरे घर पर बम फेंक दिया गया। वहां 45 किलो आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था। मैंने अपने पिताजी की रिवॉल्वर निकाली और पीछे जाकर फायरिंग शुरू कर दी। पर वे तो भाग गए थे। तो पहला बम हमला मैंने तिरंगे झंडे की रक्षा करते हुए झेला। उसके बाद तो बम-गोलियां झेलते गए अपनी लड़ाई आगे बढ़ाते गए। 1983 में दिल्ली में बम हमला हुआ। चालीस किलो आरडीएक्स इस्तेमाल हुआ। फिर 1996-97 में वाहन में विस्फोटक भरके मुझ पर हमला होना था। आतंकियों की मीटिंग हुई कि बिट्टी मरता नहीं। एक आतंकी था मेजर सिंह उसने कहा मैं मार दूंगा। पूछा गया कि तू कैसे मार देगा। वो तो मरता ही नहीं। इतने बम हमले किए। कहने लगा पूरे ट्रक में बम फिट करके। पूरा ट्रक उसके काफिले में घुसा दूंगा। मैं भी मर जाऊंगा पर वे पकड़े गए। मुझ पर हुए हमलों की बात करें तो 14 तो रिकॉर्ड में हैं। कभी पहले निकल गया, कभी प्रोग्राम कैंसल हो गया, कभी रास्ता बदल गया। कभी पकड़े गए। यह जीवन तो बोनस है।


    हमलों के बारे में मैं नहीं सोचता पर चौकस रहता हूं। मैंने टीवी पर राजीव गांधी की सुरक्षा देखकर कह दिया था कि इन पर हमला होगा। नरेंद्र मोदी पर पटना में हमले के पांच दिन पहले मैंने उन्हें चिट‌्ठी लिख दी कि मोदीजी आप पर हमला होगा। मुझे फोन आया कि आपको पहले कैसे पता लग गया। मंत्री था तो एक जगह उद्‌घाटन था। इतने बड़े इश्तेहार लग गए। मैंने कहा रास्ते में कार बम लगेगा। पीए ने कहा कार्यक्रम रद्‌द कर दो। मैंने कहा कार्यक्रम रद्‌द नहीं होगा। ब्लास्ट हो गया। दिल्ली में बम ब्लास्ट हुआ तो मैंने पहले ही कह दिया था। यह चौकस रहने की बात है। पर मैं अपनी सुरक्षा-चौकसी को किसी की परेशानी नहीं बनने देता। पुणे गया तो एक बुजुर्ग महिला सड़क पार कर एयरपोर्ट जा रही थीं। उनका बेटा काफी उम्र का लग रहा था। हमारा काफिला देखा तो पीछे हट गईं। मैं उतरा उनका हाथ पकड़ा। कहने लगी नहीं..नहीं। मैंने कहा माताजी हाथ पकड़ें। उन्होंने बच्चे की तरह हाथ पकड़ा। मैंने एयरपोर्ट तक छोड़ा, वापस आ गया। माताजी ने सिर पर हाथ रखकर आशीष दिया।

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