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युवा आबादी : समाज व सरकार के सामने भिन्न चुनौतियां

भटकाव राष्ट्र के भविष्य को अनिश्चित कर सकता है।

Danik Bhaskar

Jan 20, 2018, 05:47 AM IST
मनीष सिंह, 19 बनारस हिंदू विश्वविद्यालय मनीष सिंह, 19 बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

आंखों में उम्मीद के सपने, नई उड़ान भरता हुआ मन, कुछ कर दिखाने का दमखम और दुनिया को अपनी मुट्‌ठी में करने का साहस रखने वाला युवा कहा जाता है। उम्र का यही वह दौर है जब न केवल उस युवा के बल्कि उसके राष्ट्र का भविष्य तय किया जा सकता है। आज के भारत को युवा भारत कहा जाता है क्योंकि हमारे देश में असम्भव को संभव में बदलने वाले युवाओं की संख्या सर्वाधिक है। यदि युवा शक्ति का सही दिशा में उपयोग न किया जाए तो इसका जरा-सा भी भटकाव राष्ट्र के भविष्य को अनिश्चित कर सकता है।


सत्य यह भी है कि युवा बहुत मनमानी करते हैं और किसी की सुनते नहीं। दिशाहीनता की इस स्थिति में युवाओं की ऊर्जाओं का नकारात्मक दिशाओं की भटकाव होता जा रहा है। लक्ष्यहीनता के माहौल ने युवाओं को इतना दिग्भ्रमित करके रख दिया है कि उन्हें सूझ ही नहीं पड़ रही कि करना क्या है, हो क्या रहा है, और आखिर उनका होगा क्या? आज से दो-तीन दशक पूर्व तक साधन-सुविधाओं से दूर रहकर पढ़ाई करने वाले बच्चों में ‘सुखार्थिन कुतो विद्या, विद्यार्थिन कुतो सुखम्’ के भावों के साथ जीवन निर्माण की परम्परा बनी हुई थी। और ऐसे में जो पीढ़ियां हाल के वर्षों में नाम कमा पाई हैं, वैसा शायद अब संभव नहीं। अब हमारे युवाओं की शारीरिक स्थिति भी ऐसी नहीं रही है कि कुछ कदम ही पैदल चल सकें। धैर्य की कमी, आत्मकेंद्रितता, नशा, लालच, हिंसा, तो जैसे उनके स्वभाव का अंग बनते जा रहे हैं।


एक ताजा शोध के अनुसार अब युवा अधिक रूखे स्वभाव के हो गए हैं। वे किसी से घुलते-मिलते नहीं। इंटरनेट के बढ़ते प्रयोग के इस युग में रोजमर्रा की जिंदगी में आमने-सामने के लोगों से रिश्ते जोड़ने की अहमियत कम हो गई है। ऐसे में समाज के सामने चुनौती है कि संस्कारित युवा वर्ग का निर्माण करें वहीं, सरकार को चाहिए कि वह रोजगार के साधनों का विस्तार करके उनकी ऊर्जा को उत्पादक दिशा दे ताकि उनके साथ देश का भी उज्ज्वल भविष्य तय हो सके।

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