--Advertisement--

सांस्कृतिक संबंधों में प्रगाढ़ता से बढ़ेगी कूटनीतिक नजदीकियां

Dainik Bhaskar

Feb 08, 2018, 06:34 AM IST

द्विपक्षीय व्यापार केवल 3 बिलियन डॉलर का था जो कि अब 70 बिलियन डॉलर का है।

नगमा नासिर नगमा नासिर

गणतंत्र दिवस पर आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति ने बताया कि भारत की ‘लुक ईस्ट नीति’, ‘एक्ट ईस्ट’ के संकल्प के साथ नई करवट ले रही है। आसियान देशों के साथ रिश्ते में आई यह प्रगाढ़ता, मोदी सरकार की सबसे बड़ी विदेश नीति की उपलब्धि है। 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने जब आसियान से रिश्ते जोड़े, तब आसियान देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार केवल 3 बिलियन डॉलर का था जो कि अब 70 बिलियन डॉलर का है।


बात सिर्फ व्यापार की नहीं है। दरअसल, आसियान देश एशिया में चीन के बढ़ते दबदबे से परेशान हैं। दूसरी ओर भारत ने चीन के ‘वन बेल्ट वन रोड’ परियोजना में शामिल न होकर भी सशक्त संदेश दिया है। आसियान देश भारत की ओर उम्मीद से देख रहे हैं। इससे इतर, भारत भी चीन का बढ़ता प्रभाव कम करना चाहता है। इस रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए भारत को कई कदम उठाने होंगे। पहला, चीन के दबाव में रहने वाले आसियान देशों को यकीन दिलाना होगा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में भारत और इन देशों की भागीदारी समान अस्तित्व पर आधारित है, ताकि ये देश दबाव मुक्त हो सकें।

दूसरा, अमेरिका और जापान जैसे सहयोगियों के साथ समझ बढ़ाने पर जोर देना होगा ताकि यह मोर्चेबंदी चीन के प्रभाव पर अंकुश लगा सके। तीसरा सबसे महत्वपूर्ण यह कि भारत महात्मा बुद्ध की धरती है और आसियान देशों की 64 करोड़ आबादी में से 40 करोड़ बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं। ऐसे में बौद्ध पर्यटन स्थलों का इस प्रकार विकास करना होगा कि वह संबंध में प्रगाढ़ता ला सके। इसके अलावा, जहां इंडोनेशिया और लाओस जैसे देशों के कुछ हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, वहीं थाईलैंड में रामायण का थाई संस्करण है। सिंगापुर तथा ब्रुनेई में भारतवंशी शासक कमान संभाल चुके हैं जबकि म्यांमार की स्टेट काउंसलर दिल्ली में पढ़ चुकी हैं। यानी केवल आर्थिक और रणनीतिक ही नहीं बल्कि धार्मिक व सांस्कृतिक संबंधों में प्रगाढ़ता से भी खूब नजदीकियां बढ़ने के आसार हैं। जरूरत है केवल प्रयास तेज करने की।

X
नगमा नासिरनगमा नासिर
Astrology

Recommended

Click to listen..