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डेटा से लोगों को अधिकार देने में भारत नेतृत्व करेगा

डेटा से लोगों को अधिकार देने में भारत नेतृत्व करेगा

Dainik Bhaskar

Dec 28, 2017, 07:54 AM IST
नंदन नीलेकणि को-फाउंडर, इन्फोसिस नंदन नीलेकणि को-फाउंडर, इन्फोसिस

बीते 2017 के साल में आई फोन ने दस साल पूरे किए। पिछले दशक में स्मार्टफोन ने बहुत सारे उद्योगों का चेहरा बदल दिया। इन्हीं के कारण दुनिया की सबसे बड़ी टैक्सी कंपनी उबर के पास एक भी टैक्सी नहीं है; सबसे बड़ी होटल शृंखला एयरबीएनबी के पास कोई होटल नहीं है। सूची और भी लंबी हो सकती है। दस साल पहले 2007 में दुनिया की पांच सबसे बड़ी कंपनियों में चार तेल कंपनियां और सिर्फ एक टेक्नोलॉजी कंपनी थी। आज पांचों टेक्नोलॉजी कंपनियां हैं। आश्चर्य नहीं कि डेटा अब नया तेल है।


टेक्नोलॉजी में किसी भी बिज़नेस को बुनियादी रूप से बदलने की ताकत है। इन बदलावों का कई गुना प्रभाव होगा यानी जो एक दशक में हुआ वह जल्द ही एक साल से भी कम वक्त में हो जाएगा। मोबाइल व इंटरनेट से अविचलित बहुत कम क्षेत्र रह गए हैं। 2017 के बदलावों की चर्चा करके आइए हम अनुमान लगाएं कि 2018 में क्या बदलाव होगा।


2017 में दुनिया अधिक जुड़ी है। मोटेतौर पर आधी वयस्क आबादी की स्मार्टफोन तक पहुंच है। भारत स्मार्टफोन का दूसरा सबसे बड़ा और एंड्रॉयट पर एप डाउनलोड का सबसे बड़ा बाजार है। यह मोबाइल डेटा का सबसे बड़ा कंज्यूमर हो गया है। हम साल-दर-साल 900 फीसदी की चौंकाने वाली दर से बढ़ें हैं। महत्वपूर्ण यह है कि यह बढ़त भीतर से आ रही है। अंग्रेजी की तुलना में गैर-अंग्रेजी की सर्च 10 गुना तेजी से बढ़ रही है। हम देखे जाने वाले वीडियो के मिनट में 400 फीसदी वृद्धि के साथ यू ट्यूब के भी दूसरे सबसे बड़े बाजार हैं। ज्यादा लोगों को मालूम नहीं है कि 27 अरब व्यूज़ के साथ टी-सीरिज यू ट्यूब पर दुनिया में सर्वाधिक देखा जाने वाला चैनल है। दूसरे नंबर पर सिर्फ 18 अरब व्यू वाला चैनल है।


एक अरब यूज़र तक पहुंचने वाला ‘आधार’ एकमात्र ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो निजी क्षेत्र में नहीं है। यह 5.5 साल में ही एक अरब यूज़र तक पहुंच गया, फेसबुक की तुलना में तेजी से। इससे भी बड़ी बात यह कि सरकार ने एक अद्‌भुत डिजिटल इन्फ्रांस्ट्रक्चर ‘इंडिया स्टैक’ बनाया है। सिर्फ इस साल में ही ई-नो यूवर कस्टमर (ई-केवाईसी) की 3 अरब रिक्वेस्ट मिली हैं। भीम यूनिफाइड पेमेट्स इंटरफेस भी भारत में बना अनूठा पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जो सिर्फ 15 माह में शून्य से 10 करोड़ तक पहुंच गया। क्रेडिट व डेबिट कार्ड ने करीब 20 साल में जिस लेन-देन को हासिल किया उसका यह 26 फीसदी है। भारत सच्चे अर्थों में डिजिटल देश बनने की राह पर है।


2017 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संक्षेप में एआई का उदय हुआ। यह लाखों डेटा पॉइंट पर लाखों प्रयासों से मशीन को ‘सीखने’ की सुविधा दे रहा है। दादी-नानी सही कहती थी कि प्रैक्टिस ही परफेक्ट बनाता है। मशीन सिर्फ मानव से अधिक तेजी व अधिक मात्रा में प्रैक्टिस कर सकती हैं। एआई ने भाषा के अनुवाद, लेखों का सार निकालने, कार चलाने, सर्जरी करने, जीनोम सिक्वेंस डिकोड करने और यहां तक की संगीत की धुनें बनाने जैसे रचनात्मक काम में मानव को पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है।


लेकिन, टेक्नोलॉजी के बढ़ने का मतलब तरक्की नहीं होता। 2017 में तेजी से बढ़ती टेक्नोलॉजी के खतरे भी पता चले। अस्पतालों सहित कई बिज़नेस पर वायरस ने कब्जा कर लिया और फिरौती में बिटकॉइन मांगे गए। इन्हें ‘रैन्समवेयर’ कहा गया। इससे टेक्नोलॉजी पर दुनिया की निर्भरता, इन सिस्टम की खामियां और दुर्भावना रखने वाले लोगों को मिलने वाली ताकत का पता चला। 2018 में साइबर सिक्योरिटी और प्रोटेक्शन पर नया फोकस रहेगा। फिर भी एआई व डेटा से टेक्नोलॉजी द्वारा समस्याएं सुलझाने को लेकर अप्रत्याशित उम्मीद हैं। जैसे पश्चिम डॉक्टरों की जगह रोबोटिक सर्जन लाने का प्रयास करेगा। भारत को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए एआई की मदद लेनी चाहिए।


डेटा प्रोटेक्शन की बातों के बीच यह नहीं भूलना चाहिए कि डेटा सशक्तीकरण भी करता है। आज बैंक कई भारतीयों को लोन नहीं देते। इसलिए नहीं कि वे कर्ज देने लायक नहीं है बल्कि बैंक के पास कोई तरीका नहीं है कि उनका अस्तित्व जान सकें। जब लोग डिजिटल ट्रांजेक्शन करते हैं तो पीछे निशान छोड़ते हैं, जिन तक अभी कंज्यूमर की पहुंच नहीं है। कानूनन लोगों को इस डेटा का इस्तेमाल करने की अनुमति देकर उन्हें सशक्त बनाया जा सकता है। लोगों को तेजी से व किफायती लोन दिया जा सकेगा, जिससे लोगों को सपने पूरे करने में मदद मिलेगी। उम्मीद है कि डेटा प्रोटेक्शन की तरह ही डेटा सशक्तीकरण का महत्व बताने में भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा।
टेक्नोलॉजी ने हमारी ज़िंदगी बदली है और बदलती रहेगी। डिजिटल युग में फायदा यह है कि भारत में वैश्विक ट्रेंड सेट करने की प्रतिभा व ज़िद है। वह सिर्फ दर्शक नहीं रहेगा। 2018 के लिए हम कई अनुमान व्यक्त कर सकते हैं लेकिन, आम भारतीय ही वास्तव में भविष्य को बेहतरी के लिए बदल सकता है!

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