जीने की राह

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आपसे अच्छे प्रभावित और बुरे भयभीत हों

इस दुनिया में हमें कर्म करते हुए अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोगों का सामना करना है।

Danik Bhaskar

Jan 30, 2018, 06:24 AM IST
पं. िवजयशंकर मेहता पं. िवजयशंकर मेहता

अच्छे काम अच्छे लोगों को तो प्रभावित करते ही हैं, लेकिन यदि उनसे बुरे लोग प्रभावित हो जाएं तो फिर वह अच्छा काम श्रेष्ठ हो जाता है। हमें हनुमानजी से सीखना चाहिए कि वो जब भी कोई काम करते थे, सही और अच्छा ही करते थे। उनके काम की सबसे बड़ी विशेषता होती थी कि उससे भले लोग तो लाभ उठाते थे, अच्छे लोगों को उनका काम अच्छा भी लगता था लेकिन बुरे लोग भयभीत हो जाते थे।

रावण-अंगद की बातचीत में हनुमानजी को बहुत अच्छे ढंग से याद किया गया है। रावण अंगद की बात को गंभीरता से नहीं लेते हुए खिल्ली उड़ा रहा था। अंगद से कह दिया था कि तुम, सुग्रीव, मेरा छोटा भाई विभीषण और जामवंत ये सब किसी काम के नहीं हैं। एक तरह से रावण उनको नकार रहा था और उसी समय उसे हनुमानजी याद आ गए। तुलसीदासजी ने लिखा है, ‘सिल्पि कर्म जानहिं नल नीला। है कपि एक महा बलसीला।। आवा प्रथम नगरू जेहिं जारा। सुनत बचन कह बालिकुमारा।। रावण अंगद से कहता है- तुम तो नकारा हो ही, नल-नील शिल्पकर्म जानते हैं, वो मुझसे क्या लड़ेंगे? हां, एक वानर जरूर महाबलशाली है, जो पहले आकर मेरी लंका जला गया था। हमारे लिए सोचने की बात यह है कि हनुमानजी ऐसा पराक्रम दिखाकर गए थे कि रावण के दिमाग में भय बैठ गया।

इस दुनिया में हमें कर्म करते हुए अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोगों का सामना करना है। प्रयास ऐसा कीजिए कि जो भी काम करें उससे भले लोग प्रभावित हों और बुरे भयभीत रहें। तब ही सच्चे हनुमान भक्त कहलाएंगे।

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