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बुनियादी सुधारों में तेजी लाने से ही बदलेगी तस्वीर

क्रेडिट डेटा ब्यूरो की भूमिका महत्वपूर्ण रही, अब हमारे यह मजबूत पक्ष पर हमें आगे की इमारत

Dainik Bhaskar

Jan 25, 2018, 05:36 AM IST
सौरभ त्रिपाठी, सीनियर पार्टनर और एमडी, द बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप सौरभ त्रिपाठी, सीनियर पार्टनर और एमडी, द बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप

बैंकिंग सेक्टर की सबसे बड़ी चिंता है फंसे हुए लोन, जो सितंबर 2017 तक 10.2 फीसदी हो गया था। यह खासतौर पर सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के लिए खराब है, जिनके ऋण खाते का छठा हिस्सा फंसा हुआ है। इसमें एक राह तो रिकवरी की है, जिसके लिए अधिक कड़े दिवालिया कानून की मदद ली जा रही है। दूसरा है बैंकों द्वारा पूंजी जुटाना ताकि फंसे लोन का बोझ संभालने के साथ ऋण देने की रफ्तार बढ़ाई जा सके। इसीसे जुड़ी है क्रेडिट ग्रोथ। देश को बिज़नेस करने की आसानी में जो बेहतर रेटिंग मिली उसमें क्रेडिट डेटा ब्यूरो की भूमिका महत्वपूर्ण रही, अब हमारे यह मजबूत पक्ष पर हमें आगे की इमारत

बनाने की आवश्यकता है। बजट से ये अपेक्षाए हैं :
सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के रूपांतरण के लिए ठोस उपाय: जैसा हमने पहले कहा है सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों का बड़ा हिस्सा फंसे हुए लोन के दबाव में है। इससे उनमें जोखिम लेने की क्षमता घटती है और प्रबंधन के पास वृद्धि के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं बचती। सरकार को संचालन संबंधी स्वायत्तता, टेक्नोलॉजी के स्तर पर पुनर्गठन, बिज़नेस मॉडल में बदलाव और एचआर संबंध हस्तक्षेप के रूप में सुधार के लिए ठोस योजना लानी चाहिए। केवल गहरी एवं बुनियादी बदलाव ही बैंकों को उत्तरोत्तर जटिल हो रहे बिज़नेस वातावरण में आत्मविश्वास के साथ स्पर्धा में उतरने योग्य बना सकते हैं। इस तरह इस योजना का जोर बैंकिंग सेक्टर में आत्मविश्वास बढ़ाने का अधिक है।


एनपीए का समाधान : नॉन परफार्मिंग असेट (एनपीए) यानी बैंकों की फंसी पड़ी संपत्तियों का समाधान बहुत धीमी गति से हो रहा है। ऐसी कोई प्रक्रिया खोजना निर्णायक होगा, जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों से फंसे हुए ऋण को इकट्‌ठा कर किसी एक संस्था को देकर समस्या हल करने का दायित्व सौंप दिया जाए। ऐसी कोई संस्था ही प्रक्रिया को गति देने के लिए आवश्यक निवेशकों और पेशेवर असेट मैनेजरों की सेवाएं ले पाएगी, जो समाधान के लिए आवश्यक है।


ऋण संबंधी बुनियादी ढांचा और डेटा उपलब्धता

भारत को बिज़नेस करने की आसानी की रेटिंग में ऋण प्राप्त करने की आसानी में 29वीं रेटिंग दी गई। यह प्रभावशाली रेटिंग क्रेडिट ब्यूरो इन्फ्रास्ट्रक्चर की बदौलत हासिल हुई, जो सारे ऋण लेने वालों का विशाल डेटा विश्वसनीय तरीके से इकट्‌ठा करता है। दूसरी तरफ यह बात भी है कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके पास आय का कोई सबूत अथवा क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है कि वे बैंकों से ऋण लेने के पात्र बन सकें। हमारा जो मजबूत पक्ष है हमें उसे और बढ़ाना होगा। ब्यूरो डेटा को टेल्को, बिजली आदि जैसी सुविधाओं का बिलिंग तथा पेमेंट डेटा भी ध्यान में लेना होगा। इससे अधिक लोग ब्यूरो के दायरे में आ जाएंगे और इस तरह अब तक बाहर रहे तबके की भी ऋण लेने की पात्रता बढ़ जाएगी। इसके लिए संबंधित कानूनों को मजूबत करना होगा।


इसी मुद्‌दे पर हमें देश में खुली बैंकिंग का ढांचा अपनाने की जरूरत है। इस क्षेत्र में कस्टमर की अनुमति मिलने के बाद हर बैंक को कस्टमर के लेन-देन का स्टेटमेंट संभावित ऋणदाता को इलेक्ट्रॉनिकली शेयर करना होगा। इस मॉडल से नए बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं (एनबीएफसी) की पहुंच उस डेटा तक हो जाएगी, जिन पर बैंकों का एकाधिकार है। वे इस जानकारी का इस्तेमाल ऋण संबंधी फैसले लेने में कर सकेंगे। इंडस्ट्री के स्तर पर ओपन बैंकिंग की सुविधा के लिए हमें एक नियामक प्रक्रिया की जरूरत होगी।


एनबीएफसी को मजबूती देना

चाहे बैंकों की रफ्तार सुस्त पड़ी हो लेकिन एनबीएफसी सेक्टर छोट और मझले उद्योगों तथा रिटेल कस्टमर को ऋण देने में उछाल मारता हुआ बढ़ रहा है। मैं फिर जोर देकर कहूंगा कि अपनी समस्याएं सुलझाने के लिए हमें अपने मजबूत पक्षों पर काम करना चाहिए। एनबीएफसी सेक्टर को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि वह क्रेडिट बढ़ाने में अपनी भूमिका निभा सके।
एसएआरएफएएसआई कानून एनबीएफसी पर लागू नहीं होता, जो बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं को लोन वसूली के लिए रहवासी अथवा व्यावसायिक संपत्ति नीलाम करने की अनुमति देता है। एनबीएफसी, पीएसएलसी (प्रॉयारिटी सेक्टर लेंडिंग सर्टिफिकेट) ऑनलाइन नीलामी में भाग नहीं ले सकता। इसकी अनुमति दी जानी चाहिए। यह बैंकों की लाभप्रदता को प्रोत्साहन देगा (सप्लाई बढ़ने के साथ पीएसएलसी की लागत घटती है।), जो पीएसएलसी के दायित्व पूरे करेंगे। कुल-मिलाकर ये सारे उपाय बुनियादी सुधारों से संबंधित हैं।

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सौरभ त्रिपाठी, सीनियर पार्टनर और एमडी, द बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुपसौरभ त्रिपाठी, सीनियर पार्टनर और एमडी, द बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप
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