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मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाएगा एग्जि़ट टेस्ट

विधेयक में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनका मकसद पहली नज़र में मेडिकल शिक्षा में फैले भ्रष्टाचार को कम करना है

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 07:24 AM IST
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केंद्रीय कैबिनेट ने बीते दिनों एक बिल को मंजूरी दी है जिसके तहत देश में मेडिकल शिक्षा को नियंत्रित करने के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह नेशनल मेडिकल कमीशन के गठन का प्रावधान है। विधेयक में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनका मकसद पहली नज़र में मेडिकल शिक्षा में फैले भ्रष्टाचार को कम करना है। जैसे कि मेडिकल कॉलेजों के लिए हर साल निरीक्षण की अनिवार्यता खत्म करना, सीटों की संख्या बढ़ाने की आज़ादी आदि।


मौजूदा व्यवस्था में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया हर साल इनका निरीक्षण करता है। मेडिकल शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार की यह सबसे बड़ी वजह है। एमसीआई द्वारा पैसे लेकर कॉलेजों को मान्यता देने के आरोप इतने गंभीर थे कि वर्ष 2010 में इसके तत्कालीन अध्यक्ष केतन देसाई को गिरफ्तार किया गया था। नए बिल के प्रावधान लागू हुए तो कॉलेजों को मान्यता के लिए एक बार ही अनुमति की जरूरत होगी। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं कि वे मनमानी कर सकेंगे। सरकार द्वारा गठित मेडिकल असेसमेंट और रेटिंग बोर्ड समय-समय पर उनका निरीक्षण करेगी और धांधलियां पाए जाने पर उन्हें दंडित भी कर सकेगी। हालांकि, नए बिल में यह स्पष्ट नहीं है कि कॉलेजों द्वारा फर्जी फैकल्टी, इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधी कमियों को छिपाने के प्रयासों पर नकेल कैसे कसी जाएगी।

मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए एग्जिट टेस्ट का प्रावधान भी अच्छा है। यह संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता का आकलन करने में मददगार होगा, क्योंकि डिग्री लेने वाले सभी छात्रों को तीन साल के अंदर यह टेस्ट क्लियर करना होगा। यदि इसी को एकमात्र पैमाना बना लिया जाए तो संस्थान, खासकर कम सुविधाओं वाले निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए बने रहना मुश्किल होगा। नया बिल कई मायनों में अच्छा है, बशर्ते इसके प्रावधानों को सही तरीके से लागू किया जाए। यदि पूर्ववर्ती मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की तरह नेशनल मेडिकल कमीशन भी संस्थानों की रोजाना की गतिविधियों पर नज़र रखे, जांच का डर दिखाकर भ्रष्टाचार के लिए उकसानेे लगे तो मेडिकल शिक्षा में सुधार की गुंजाइश नहीं हो सकती।